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May 17, 2022
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तमिलनाडु के इरुला समुदाय को पीएमएवाई योजना के तहत मिलेंगे घर

चेन्नई, 12 मई (आईएएनएस)| तमिल सुपरस्टार सूर्या की फिल्म ‘जय भीम’ में आदिवासी इरुला समुदाय की समस्याओं को दर्शाया गया है और यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल रही है। हालांकि, इरुला समुदाय का जीवन कठिन रहा है और कई लोगों के पास अस्थायी झोपड़ियों के अलावा रहने के लिए घर नहीं हैं, जिन्हें भारी बारिश और तूफान के दौरान बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। रानीपेट जिले के अधिकारियों ने जिले के 172 क्षेत्रों में 2,899 परिवारों के 9,500 इरुलर के बीच एक सर्वेक्षण और गणना की और पाया कि इनमें से कई परिवारों के पास सिवाय अस्थायी झोंपड़ियों और तंबू के रहने के लिए घर नहीं हैं।

गणना पूरी होने के साथ जिला प्रशासन ने एक प्रस्ताव तैयार किया है और इसे राज्य सरकार को प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) और कलैनार आवास योजना से समर्थन प्राप्त करके इरुला समुदाय के लिए घर बनाने के लिए भेजा है।

जिले में इरुला समुदाय के गणना अभियान का नेतृत्व करने वाले रानीपेट के जिला कलेक्टर भास्करपांडियन ने आईएएनएस को बताया, “जिला अधिकारियों ने जिले में इरुला समुदाय की एक गणना की है और उन मूलभूत सुविधाओं को सूचीबद्ध किया है जिनकी उन्हें आवश्यकता है। वे छोटे समूहों में रहते हैं और अलग-अलग जगहों पर और उनका विवरण प्राप्त करना मुश्किल था। हालांकि, हमने उन लोगों की पहचान कर ली है जिन्हें घरों की जरूरत है। इस संबंध में राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है। उनके लिए पीएमएवाई और कलैनार हाउसिंग स्कीम के तहत मकान बनाए जाएंगे।”

जिला कलेक्टर ने रानीपेट जिले के कलावी, अथियानम और मेलनेली गांवों का भी निरीक्षण किया है और पाया है कि 19 परिवार पोल लगाने के बाद भी बिना बिजली के रह रहे हैं। कनेक्शन इसलिए नहीं हो पाया, क्योंकि उनके पास प्रत्येक कनेक्शन के लिए आवश्यक 3,000 रुपये जमा के रूप में देने के लिए धनराशि ही नहीं थी।

भास्करपांडियन ने जिला अधिकारियों को 19 परिवारों के लिए जमा राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया और जिला प्रशासन द्वारा 57,000 रुपये की राशि का भुगतान किया गया।

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