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मप्र : कोरोना की चेन तोड़ने के लिए गांव में नाकेबंदी

छतरपुर, 25 अप्रैल (आईएएनएस)| कोरोना संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए जनता कर्फ्यू पर अमल किया जा रहा है। मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में तो कई गांव के लोगों ने अपने गांव की सीमाओं केा सील कर दिया है और दूसरे गांव के लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी है। छतरपुर में भी कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। प्रशासन की पहल पर ग्रामीण जनता कर्फ्यू पर जो दे रहे हैं। इसी क्रम में जिले के कई गांवों में ग्रामीणों ने मुख्य सड़कों पर नाकाबंदी कर दी है और गांव के बाहर तख्ती लगा दी है कि बाहरी व्यक्ति का गांव में प्रवेष पूरी तरह वर्जित किया जाता है।

जिला के बिजावर जनपद पंचायत अंतर्गत एक गांव है गुलाट। मुख्यालय से 42 किमी दूर इस गांव में पिछले दिनो कोरोना पॉजिटव पाए गए थे। गांव के छेदी राम साहू ने बताया कि गांव में बाहरी लोगों की खूब आवाजाही होती थी, गांव का कोई भी व्यक्ति आपसी बुराई के डर से किसी को रोकता नहीं था। ऐसी दशा में गांव की सरपंच अवध रानी यादव और सचिव जागेश्वर लोधी ने एक बैठक की थी।

बैठक में तय किया गया कि किसी भी बाहरी व्यक्ति को गांव में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इसके लिए गांव की मुख्य सड़क पर नाकाबंदी कर दी गई। अब कोई व्यक्ति गांव में आता है तो उसकी पहले पूरी जानकारी ली जाती है। स्वास्थ्य होने पर और गांव में जरूरी काम होने पर ही उसे प्रवेश दिया जाता है।

गांव के सचिव जागेश्वर लोधी ने बताया कि गांव में बड़ी संख्या में बाहर गए लोग लौटकर आए हैं, हरिद्धार कुंभ से लौटे पांच लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए। इसी कारण गांव के लोगों ने सामूहिक टूर पर निर्णय लिया कि कोरोना जब तक है, तब तक गांव में किसी बाहरी व्यक्ति को प्रवेश नहीं दिया जाएगा।

पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा ने बताया कि गांव के लोगों को इस बात के लिए प्रेरित किया गया है कि गांव में कोरोना के संक्रमण रोकने के लिए समितियां बनाई जाएं और गांव में नाकाबंदी की जाए, जिस गांव में इस तरह की समितियां बनें, उसकी सूचना संबंधित थाने को हो, ताकि सभी तरह का समन्वय बना रहे।

उन्हांेने बताया कि इस तरह के 71 गांवों में अब तक ये समितियां बन चुकी हैं और गांव वालों ने स्वेच्छा से अपने गांव में आने जाने वालों के लिए बेरियर लगा दिए हैं और उन पर गांव के लोग निगरानी भी कर रहे हैं, एक दो दिन में जिले के 200 से ज्यादा गांव में इस तरह की समितिया अपना काम करने लगेंगी।

शर्मा ने कहा, “हमारा लक्ष्य है जिले एक हजार गांवों में इस तरह की समितियां बनाई जाएं। जिले के थाने वाले हर दिन पांच पांच गांवों में पहुंचकर ग्रामीणों को इस तरह की समितियां बनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं, अब तक के परिणाम अच्छे रहे हैं। इन समितियों में गांव के 18 से 30 वर्ष के लोगों को रखा जा रहा है, जो बाहर से सामान लाने ले जाने का काम भी करेंगे, ताकि बुजुर्गो को परेशानी न हो और गांव में किसी तरह की कमी ना रहे।”

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