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कोविड से ठीक हुए मरीजों का डॉक्टरों के प्रति प्रेम, किसी ने मूर्ति भेंट की तो किसी ने भेजा वीडियो संदेश

नई दिल्ली, 6 जून (आईएएनएस)| भारत में कोरोना महामारी के दौरान लोगों ने अपने परिवार के सदस्यों को खो दिया । कई ऐसे लोग भी थे जिनके बचने की उम्मीद बहुत कम थी लेकिन उन्होंने कोरोना को सिर्फ हराया ही नहीं बल्कि डॉक्टरों को अपने अपने ढंग से शुक्रिया अदा भी किया।

दरअसल देश में कोरोना की दूसरी लहर के चलते मरीजों की संख्या और मौतों में तेजी से वृद्धि देखी गई, जिसके कारण देश में इंटेसिव केयर वाडरें में खाली बेडों की काफी कमी भी हुई।

कई लोग अपने प्रियजनों को अस्पताल में भर्ती कराने के लिए मीलों तक दौड़ने को मजबूर हुए, लेकिन इन सब के बीच कोरोना को हराने का जज्बा और परिवार के सदस्यों से फिर से मिलने की चाह में लोगों ने कोरोना को हराया ही नहीं बल्कि डॉक्टरों की महनत देख मरीज बेहद खुश भी हुए।

65 वर्षीय नोएडा निवासी धीरेंद्र सक्सेना 10 दिन दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती रहे, वहीं जब वापस लौटे तो उन्होंने डॉक्टरो को हनुमान जी की एक मूर्ति भेंट की।

धीरेंद्र सक्सेना ने बताया कि, 6 अप्रैल को कोरोना संक्रमित हुआ, 3 दिन बेड तलाशने की पूरी कोशिश की, सैंकडों फोन किये लेकिन कहीं कुछ व्यवस्था नहीं हुई। दूसरी ओर मेरी ऑक्सीजन लेवल लगातार गिर रहा था। लेकिन 3 दिन बाद ही दिल्ली के एक अस्पताल में मुझे जगह मिल गई।

दरअसल धीरेंद्र के 2 बच्चे है जो विदेश में रहते है, घर में पत्नी के अलावा मदद करने वाला कोई नहीं था। हालांकि धीरेंद्र घर मे आइसोलेशन में थे लेकिन ऑक्सिजन लेवल गिरने के बाद अचानक उनकी हालत बिगड़ गई।

उन्होंने बताया, जब मुझे अस्पताल में बेड मिला तो डॉक्टरों ने तुरंत मेरे ऑक्सीजन देना शुरू कर दिया, जिस तरह से डॉकटर मरीजों का इलाज कर रहे थे वो बेहद काबिले तारीफ था। डॉकटरों ने मेरा भी बहुत ध्यान रखा। उस वक्त मुझे लगा कि किस तरह अपनी जान की परवाह न कर हमारी रक्षा करने में लगे हुए हैं।

अस्पताल से करीब 10 दिन बाद जब मैं ठीक होकर वापस घर पहुंचा तो मेरी आँखें नम हो गई। मुझे डॉक्टरों का शुक्रिया अदा करना था। इसलिए मैंने एक हनुमान जी की मूर्ति डॉकटरों को भेंट की ताकि भगवान उनकी रक्षा कर सके।

धीरेंद्र अकेले ऐसे शख्श नहीं जिन्होंने डॉकटरों को शुक्रिया अदा किया हो। कुछ ऐसे लोग भी हैं जिनके घर के सभी सदस्य संक्रमित हुए लेकिन डॉक्टरों की महनत के आगे कोरोना को मात द ेदी। वहीं घर के सभी सदस्य जब इलाज पुरा कर सुरक्षित वापस लौटे तो डॉक्टरों को शुक्रिया अदा करने के लिए एक वीडियो संदेश भी बनाया।

28 वर्षीय नोएडा निवासी सार्थक सक्सेना और उनके घर के अन्य सदस्यों की 13 अप्रैल को कोरोना के लक्षण दिखने शुरू हुए। जांच कराने के बाद 17 अप्रैल को सार्थक के अलावा उनके माता- पिता, बहन और नाना संक्रमित पाए गए।

सार्थक ने बताया कि, 20 अप्रैल को मेरी बहन को छोड़ सभी लोग अस्पताल में भर्ती हुए थे। 17 अप्रैल को संक्रमित होने बाद 3 दिन तक अस्पताल में भर्ती होने के लिए सभी जगहों पर फोन किया लेकिन कहीं अस्पताल नहीं मिला।

दूसरी ओर मेरे माँ और नाना की ऑक्सिजन लेवल डाउन हो रही थी। मैं पूरी तरह से घबरा गया। घर के सभी सदस्य संक्रमित होने के कारण कोई मदद करने वाला नहीं था। तभी मैंने दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल में कोशिश की और घर के सदस्यों के साथ भर्ती हो गया।

अस्पताल में मेरी माँ और नाना आईसीयू वार्ड में भर्ती थे। मैं पूरी तरह से टूट चुका था क्योंकि हर तरफ से सिर्फ नकारात्मक खबरें ही सुनने को मिल रही थी। लेकिन जिस तरह डॉक्टरों ने इलाज किया हम उनके बहुत शुक्रगुजार है।

6 मई तक घर के सभी लोग कोरोना को हराकर वापस घर लौट आए, मुझे समझ नहीं आ रहा था कि किस तरह डॉक्टरों का शुक्रिया अदा करूँ, इसलिए मैंने एक वीडियो बनाई और अपने मन की सारी बात कहकर सभी का शुक्रिया अदा कर दिया।

सार्थक के अनुसार, संक्रमित होने के दौरान का वक्त बहुत डरावना और मन को तोड़ देने वाला था। लेकिन मैं बहुत खुश नसीब मानता हूं कि अस्पताल से मेरा पूरा परिवार वापस आ गया।

इन सब के अलावा कुछ ऐसे लोग भी हैं जिनके अपने अस्पताल से इलाज कराकर वापस लौटे तो डॉक्टरों को शुक्रिया बोलने के लिए एक प्रेजेंटेशन बना दी, जिसमें अस्पताल को लेकर बातें लिखी गई। किस तरह का इलाज दिया गया, कैसे डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रहे थे।

30 वर्षीय दिल्ली के मोती नगर निवासी तारुष जैन के घर के 5 सदस्य संक्रमित हुये, जिनमें वह खुद उनकी माँ, पिता और नाना नानी शामिल थे। हालांकि अस्पताल में भर्ती होने के अगले ही दिन उनके 84 वर्षीय नाना की मृत्यु हो गई थी।

तारुष जैन ने बताया कि, घर के 5 सदस्य संक्रमित होने के बाद 16 अप्रैल को अस्पताल में तीन लोग भर्ती हुए, मेरी माँ सीपीयू में भर्ती थी, जिधर उनका बेहद ढंग से इलाज किया गया। मैंने डॉकटरों को जो प्रेजेंटेशन बनाकर भेजी उसके दो कारण थे।

पहला की हम सभी लोगों के मन में सरकारी अस्पतालों को लेकर एक गलत धारणा बनी हुई है। मेरी माँ जब घर लौटीं थी तो उन्होंने मुझे ब्याया था कि किस तरह डॉक्टर सभी मरीजों को एक समान मान इलाज कर रहे थे। अस्पताल में साफ सफाई, मरीजों के खाना आदि बेहद अच्छी थी।

ये सब सुनने के बाद मैंने डॉक्टरों को शुक्रिया अदा करने के लिए एक प्रेजेंटेशन बनाई और डॉक्टरों को भेजी।

कोरोना महामारी डॉक्टरों के लिए एक बहुत ही बड़ी चुनौती रही। अस्पतालों में मरीजों के इलाज करने के दौरान कई डोक्टर संक्रमित हुए और अपनी जान गवां बैठे। यही कारण है कि कोविड से जो लोग ठीक हुए उन्होंने डॉक्टरों का मनोबल बढ़ाने के लिए इस तरह का कदम उठाया।

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