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डब्ल्यूटीसी विजेता बनने के साथ न्यूजीलैंड ने आईसीसी का दूसरा टूर्नामेंट अपने नाम किया

साउथम्पटन, 24 जून (आईएएनएस)| न्यूजीलैंड ने भारत को यहां खेले गए विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (डब्ल्यूटीसी) के फाइनल मुकाबले में हराने के साथ ही अपना दूसरा आईसीसी टूर्नामेंट जीता और इसके साथ ही वह क्रिकेट का ओवरऑल चैंपियंस बना।

न्यूजीलैंड ने इससे पहले साल 2000 में आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी जीती थी, लेकिन उन्होंने अब डब्ल्यूटीसी के पहले संस्करण को जीत इतिहास रचा।

यह मुकाबला अंत तक कड़ा रहा। भारत को हालांकि केन विलियम्सन और रॉस टेलर की जोड़ी को तोड़ना था, जिन्होंने तीसरे विकेट के लिए बड़ी साझेदारी की। चेतेश्वर पुजारा ने हालांकि फर्स्ट स्लिप में कैच छोड़कर मौका गंवाया।

पूरे मैच में बल्लेबाजी करना मुश्किल था, लेकिन न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों ने इस परिस्थिति में बेहतर बल्लेबाजी की। इस बीच, भारत को विराट कोहली की कप्तानी में अभी भी आईसीसी टूर्नामेंट जीतने का इंतजार है जो इस हार के साथ ही बढ़ गया है।

भारत ने छठे दिन दो विकेट पर 64 रन से अपनी पारी आगे बढ़ाई थी, लेकिन उसके त्रिमुर्ति ने निराश किया। छह फुट आठ इंच के काइल जैमिसन ने बेहतरीन गेंदबाजी कर कोहली को आउट किया। इसके बाद उन्होंने पुजारा को भी पवेलियन भेजा।

इसके बाद अंजिक्य रहाणे पर भार रहा लेकिन वह भी अपना विकेट गंवा बैठे। ऋषभ पंत ने जरूर कुछ कोशिश की लेकिन बड़ी पारी नहीं खेल सके। इसमें कोई शक नहीं कि 23 वर्षीय बल्लेबाज प्रतिभाशाली हैं, लेकिन उन्हें अपनी तकनीक पर ध्यान देने की जरूरत है। हालांकि, न्यूजीलैंड की पारी के दौरान वह अस्वस्थ हुए और टी ब्रेक के बाद मैदान से बाहर चले गए। उनकी जगह रिद्धिमान साहा ने विकेटकिपिंग का जिम्मा संभाला।

Image Credit: @ICC (Twitter)

न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाजों ने भारतीय समकक्षों की तुलना में पिच को बेहतर समझा। दोपहर के बाद भारत के पास नई गेंद से कुछ करने का अवसर था लेकिन यह ज्यादा प्रभावशाली नहीं रहा।

न्यूजीलैंड की आबादी 50 लाख है जो भारत की आबादी का 0.36 प्रतिशत है। भारत में परिव्यय की तुलना में क्रिकेट में देश का निवेश नगण्य है।

मैच के दौरान जब भी कोई भारतीय खिलाड़ी बाउंड्री लगाता या न्यूजीलैंड का कोई बल्लेबाज आउट होता तो प्रशंसक तेज आवाज में चिल्लाते, ‘इंडिया जीतेगा’।

सप्ताह में पहली बार सूरज अच्छे तरीके से निकला और ग्रीन आउटफील्ड बेहतर नजर आई। लेकिन इसमें भारतीय बल्लेबाजी क्रम कोई करिश्मा नहीं दिखा सका।

एक तथ्य यह भी है कि न्यूजीलैंड के खिलाफ लगातार छह टेस्ट पारियों में कोहली की टीम 250 के स्कोर को पार करने में नाकाम रही है जिसमें से चार बार वह 200 से भी कम के स्कोर पर सिमटी है। यह दर्शाता है कि भारतीय बल्लेबाज तेजी से पार नहीं पा रहे हैं।

इस बात को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है कि कीवी टीम को यहां दो फायदे मिले। पहला इंग्लिश वातावरण न्यूजीलैंड के समान है और दूसरा उसने फाइनल मुकाबले से पहले इंग्लैंड के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज खेली। कीवी टीम की तैयारी अच्छी थी और भारत को इस बात का अंदाजा था।

Image Credit: @ICC (Twitter)

1986 के अलावा इंग्लिश समर की पहली छमाई और जून का महीना इस वर्ग में आता है जहां भारतीय क्रिकेट वारटरलू में रहता है। खेल के उच्चतम स्तर पर अपनी व्यापक पृष्ठभूमि के साथ बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली ने भारतीयों को इसके लिए कैसे भेजा।

इस मैच को देख रहे पूर्व भारतीय स्पिनर दिलीप दोशी, जिन्होंने इंग्लैंड में काउंटी और लीग क्रिकेट में करीब 15 वर्ष बिताए हैं, उन्होंने कहा, “अधिकांश समय ऐसा लग रहा था कि भारतीय खिलाड़ी अभ्यास मैच खेल रहे हैं।”

(सीनियर क्रिकेट लेखक अशीष रे ब्रॉडकास्टर और ‘द वर्ल्ड कप : द इंडियन चैलेंज’ किताब के लेखक हैं)

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