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क्या अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का नया चोकर्स बन रहा है भारत

साउथम्पटन, 24 जून (आईएएनएस)| भारतीय टीम को न्यूजीलैंड के खिलाफ विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (डब्ल्यूटीसी) के फाइनल मुकाबले में मिली हार के बाद इस बात पर चर्चा हो रही है कि क्या भारत अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का नया चोकर्स बन गया है।

भारत को पिछले सात वर्षो में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के टूर्नामेंटों में हार का सामना करना पड़ा रहा है।

भारत ने 2011 में वनडे विश्व कप का खिताब और 2013 में चैंपियंस ट्रॉफी जीती थी। लेकिन 2014 के बाद से भारत को कई बार आईसीसी टूर्नामेंटों में पराजय झेलनी पड़ी।

भारत को 2015 वनडे विश्व कप के सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के हाथों जबकि 2016 टी20 विश्व कप के सेमीफाइनल में वेस्टइंडीज के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद उसे 2017 में चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में पाकिस्तान के हाथों शिकस्त झेलनी पड़ी और 2019 वनडे विश्व कप के सेमीफाइनल में उसे न्यूजीलैंड ने मात दी थी।

बुधवार को डब्ल्यूटीसी फाइनल के छठे और रिजर्व डे में मैच ड्रॉ की ओर जाता नजर आ रहा था लेकिन भारत की दूसरी पारी लड़खड़ाने के कारण उसने मैच गंवा दिया।

डब्ल्यूटीसी और 2019 विश्व कप में टीम इंडिया लीग चरण में शीर्ष पर थी। इसके बावजूद खिताबी मुकाबले में उसे हार मिली।

इस दौरान आईसीसी के छह में से तीन टूर्नामेंटों में टीम इंडिया को महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में हार का सामना करना पड़ा जबकि विराट कोहली के नेतृत्व में भी उसने तीन बार हार झेली।

1983 विश्व कप विजेता टीम का हिस्सा रहे टीम इंडिया के पूर्व ऑलराउंडर मदन लाल ने कहा, “डब्ल्यूटीसी का फाइनल मुकाबला ड्रॉ पर समाप्त होना चाहिए था। अगर आप किसी टूर्नामेंट को जीतना चाहते तो ऐसा सिर्फ कोहली या रोहित शर्मा के दम पर नहीं हो सकता। इसके लिए पूरी टीम के योगदान की जरूरत है। अनुभवी खिलाड़ियों के होने के बावजूद टीम का ऐसा प्रदर्शन मेरे लिए चौंकाने वाला था।”

डब्ल्यूटीसी के दौरान भारत के जीत का प्रतिशत न्यूजीलैंड से बेहतर था। भारत ने इस दौरान खेले गए 17 टेस्ट में से 12 में जीत हासिल की थी और उसके जीत का प्रतिशत 70.6 था।

दूसरी ओर न्यूजीलैंड ने 11 मैचों में सात मुकाबले जीते थे और उसका जीत का प्रतिशत 63.6 रहा था।

भारत ने विदेश में तीन में से दो सीरीज जीती थी जबकि न्यूजीलैंड ने घर से बाहर खेली गई दोनों सीरीज गंवाई थी।

मदन लाल ने कहा, “अगर आप हाल के रिकॉर्ड देखें तो पता चलेगा कि भारतीय टीम दबाव में थी।”

इस तरह कई मायनो में भारत दक्षिण अफ्रीका की तरह ही पूरे टूर्नामेंट में बेहतर करने के बाद अंत में फिसड्डी साबित हो रहा है।

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