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कलराज मिश्रा की पुस्तक का विमोचन करते ही नए विवाद में घिरे गहलोत

जयपुर, 5 जुलाई (आईएएनएस)| राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्रा की जीवनी ‘निमित मात्र हूं मैं’ रिलीज होने के साथ ही विवादों में घिर गई है।

पहला विवाद तब शुरू हुआ जब प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस पुस्तक को रिलीज करने के लिए अपनी क्वारंटीन अवधि को बीच में ही छोड़ दिया। इतना ही नहीं, इस पुस्तक में ‘भाजपा में शामिल होने’ की विनम्र अपील की गई है।

दूसरे, पुस्तक की प्रतियां 27 विश्वविद्यालय के कुलपतियों को उनकी सहमति के बगैर बेची गईं।

तीसरा, जिस पुस्तक का विमोचन के मौके पर मुख्यमंत्री गहलोत और स्पीकर सी.पी. जोशी के अलावा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला भी मौजूद थे। इस अवसर पर जोशी ने आरएसएस के वरिष्ठ नेताओं की प्रशंसा की और केंद्र सरकार द्वारा जीएसटी कार्यान्वयन की सराहना की। गौरतलब है कि केन्द्र सरकार और जीएसटी कार्यान्वयन को लेकर कांग्रेस सरकार दोनों की खुले तौर पर आलोचना करती रही है।

1 जुलाई को जैसे ही पुस्तक का विमोचन हुआ, इसके प्रकाशक ने राज्य के सरकारी विश्वविद्यालयों के 27 कुलपतियों में से प्रत्येक को 19 प्रतियां दीं, जबकि पुस्तकों की बिक्री के लिए कोई आदेश नहीं जारी किया गया था। सूत्रों ने बताया कि इन प्रतियों के साथ, 68,000 रुपये के बिल भी उनसे जुड़े उनके कर्मचारियों को सौंपे गए।

पुस्तक के विमोचन को लेकर अगला विवाद इसकी सामग्री है जो पाठकों से भाजपा में शामिल होने की अपील करता है और आश्चर्यजनक रूप से, पुस्तक का विमोचन कांग्रेस के सीएम अशोक गहलोत और स्पीकर सीपी जोशी ने किया, जो दोनों राज्य में कांग्रेस सरकार का प्रतिनिधित्व करते हैं।

पुस्तक के विमोचन से जुड़ी दूसरी दिलचस्प बात यह है कि सीएम गहलोत अपनी दो महीने की क्वारंटीन अवधि के बीच से ही इस समारोह में शामिल होने के लिए बाहर आए, उन्होंने पुस्तक विमोचन के लिए जाने से पहले इसकी सामग्री को नहीं पढ़ने पर भौंहें और सवाल उठाए।

इससे पहले 14 जून को, सीएम की मीडिया टीम ने घोषणा की थी कि गहलोत अगले एक या दो महीनों के लिए व्यक्तिगत रूप से कोई बैठक नहीं करेंगे, यह ध्यान में रखते हुए कि उन्हें कोविड की सावधानी बरतनी है।

पुस्तक को लेकर दूसरा विवाद यह है कि पृष्ठ 116 पर यह लोगों से भाजपा में शामिल होने की अपील करता है। साथ ही, यह आरएसएस के नेताओं और जीएसटी के कार्यान्वयन की प्रशंसा करता है, जिसका कांग्रेस सरकार ने विरोध किया है।

इस बीच, पुस्तक विमोचन पर बढ़ते विवाद को देखते हुए, राजभवन ने एक बयान जारी कर कहा है, प्रकाशक ने पुस्तक को प्रकाशित किया था और इसका राजभवन में विमोचन करने की अनुमति मांगी थी, जो उन्हें दी गई थी। लेकिन राजभवन का इस पुस्तक की व्यावसायिक गतिविधियों या विपणन में भूमिका या किसी प्रकार की संबद्धता नहीं है।

हालांकि, विवाद बढ़ने पर राज्य की कांग्रेस सरकार ने चुप्पी साध ली है और इस मुद्दे पर कोई बयान जारी नहीं किया है।

–आईएएनएस

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