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क्रिकेट में शारीरिक संपर्क को लेकर जीरो टॉलरेंस होना चाहिए

ट्रेंट ब्रिज, (नॉटिंघम) 7 अगस्त (आईएएनएस)| क्रिकेट एक संपर्क खेल नहीं है। जानबूझकर धक्का देने और कोहनी मारने को लेकर जीरो टॉलरेंस होना चाहिए। इस तरह की घटनाओं को सिर उठाने के साथ ही दबा देना चाहिए।

भारत और इंग्लैंड के बीच जारी पहले टेस्ट के तीसरे दिन शुक्रवार को खेल के दौरान दो बार, अंग्रेज गेंदबाजों ने इस तरह की हद पार कर दी। जबकि अंपायरों ने जेम्स एंडरसन और केएल राहुल के बीच हुए एक मौखिक द्वंद्वयुद्ध के बाद दोनों को शांत रहने के लिए कहा लेकिन उन्होंने एंडरसन और बाद में भारतीय बल्लेबाजों से कंधा रगड़ने वाले ओली रॉबिन्सन को सावधान नहीं किया।

अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के एक प्रवक्ता से जब घटनाओं पर टिप्पणी करने के लिए कहा गया तो उन्होने कहा, मैच रेफरी (इस मामले में क्रिस ब्रॉड, स्टुअर्ट के पिता) ने अंपायरों द्वारा आरोप दायर करने के बाद क्रिकेट संचालन विभाग के परामर्श से किसी भी कार्रवाई का प्रस्ताव दिया।

2021-2023 विश्व टेस्ट चैंपियनशिप को नियंत्रित करने वाली आईसीसीा की धारा 42.2.1, जिसमें से वर्तमान सीरीज एक उद्घाटन का प्रतिनिधित्व करती है, कहती है, खिलाड़ी द्वारा निम्नलिखित में से कोई भी कदम एक स्तर 4 अपराध का के लिए जिम्मेदार होगा।

– अंपायर को जान से मारने की धमकी

– अंपायर के साथ अनुचित और जानबूझकर शारीरिक संपर्क बनाना

– किसी खिलाड़ी या किसी अन्य व्यक्ति पर शारीरिक हमला करना

– हिंसा का कोई अन्य कार्य करना।

दूसरे शब्दों में, किसी खिलाड़ी को मैदान पर धक्का देना या कोहनी मारना दंडात्मक कार्रवाई नहीं माना गया है। इससे खिलाड़ियों को इस तरह घटना में लिप्त होने की आजादी मिल जाती है। इसे अगर इसे जड़ से नहीं दबाया गया, तो क्रिकेट की भावना, जिसे सज्जनता के साथ खेला जाना है, खतरे में पड़ जाएगी।

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