श्रावण मास की शुक्ल पंचमी तिथि पर मनाई जाने वाली नाग पंचमी के शुभ अवसर पर उज्जैन स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट आज रात 12 बजे श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे। यह मंदिर पूरे वर्षभर बंद रहता है और केवल एक दिन – नाग पंचमी के दिन ही इसके पट खोले जाते हैं। इस दिन मंदिर में दर्शन का विशेष महत्व होता है और हर साल लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन हेतु पहुंचते हैं।
रात्रि 12 बजे महापूजन, 12:40 से आम दर्शन
रात 12 बजे मंदिर के पट खुलने के बाद सबसे पहले पंचायती अखाड़े के महंत विनीत गिरी महाराज, महाकाल मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष और कलेक्टर नीरज कुमार सिंह द्वारा पूजन-अभिषेक किया जाएगा।
रात 12:40 बजे से आम श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के दर्शन शुरू कर दिए जाएंगे, जो 29 जुलाई की रात 12 बजे तक यानी पूरे 24 घंटे खुले रहेंगे।
महानिर्वाणी अखाड़े की परंपरागत पूजा
प्राचीन परंपराओं के अनुसार, पट खुलते ही सबसे पहले महानिर्वाणी अखाड़े के साधु-संत भगवान नागचंद्रेश्वर की पूजा करते हैं। इस दिन भगवान की त्रिकाल पूजा — प्रातः, दोपहर और संध्या — का विशेष महत्व होता है।
दोपहर 12 बजे शासन की ओर से जिला प्रशासन के अधिकारी पूजा-अर्चना करेंगे, जबकि शाम की आरती के पश्चात मंदिर समिति द्वारा विशेष पूजन संपन्न होगा।
दर्शनों के लिए विशेष इंतजाम, ऐरो ब्रिज से एंट्री
नागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन के लिए इस वर्ष भी विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए एक विशेष ऐरो ब्रिज तैयार किया गया है, जिससे श्रद्धालु मंदिर के शीर्ष तल तक पहुंच सकेंगे। दर्शन उपरांत उसी मार्ग से वापसी करवाई जाएगी।
नागचंद्रेश्वर मंदिर की पौराणिक महत्ता
यह मंदिर महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के गर्भगृह के ठीक ऊपर, ऊपरी तल पर स्थित है, जिसे ओंकारेश्वर मंदिर के शीर्ष पर माना जाता है।
इस मंदिर में स्थित अद्वितीय प्रतिमा में भगवान शिव, माता पार्वती एवं गणेश एक साथ विराजमान हैं और इन्हें सात फनों वाले नागों की शय्या पर प्रतिष्ठित किया गया है। साथ में शिव का वाहन नंदी और माता पार्वती का वाहन सिंह भी प्रतिमा में विराजित हैं।
ऐसी मान्यता है कि यह प्रतिमा नेपाल से उज्जैन लाई गई थी और दुनिया में इस तरह की प्रतिमा और कहीं नहीं है।
पूजन मुहूर्त व पंचयोगों का विशेष संयोग
नाग पंचमी का पूजन मुहूर्त इस वर्ष सुबह 6:01 से 8:37 बजे तक का है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस दिन पांच शुभ योगों का संयोग बन रहा है, जो विशेष फलदायी माना जाता है।
महाकाल मंदिर में त्रिस्तरीय देव दर्शन
महाकाल मंदिर में देवों के दर्शन तीन स्तरों पर होते हैं:
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गर्भगृह में महाकालेश्वर
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बीच के तल पर ओंकारेश्वर
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सबसे ऊपरी तल पर नागचंद्रेश्वर
पूरे वर्ष नागचंद्रेश्वर मंदिर बंद रहता है, केवल महानिर्वाणी अखाड़ा के साधु प्रतीकात्मक पूजा करते हैं।
मालवा की लोक परंपराएं : दाल बाटी व नाग पूजा
मालवा अंचल में नाग पंचमी के दिन तवे पर खाना बनाना वर्जित होता है। इस दिन परंपरागत रूप से दाल बाटी बनाई जाती है, जिसे भगवान को भोग लगाकर फिर परिवारजन ग्रहण करते हैं।
नागदेवता को दूध, दूर्वा, चंदन और फूल अर्पित किए जाते हैं। मान्यता है कि इससे कालसर्प दोष, सर्प भय और पितृदोष से मुक्ति मिलती है।
पट बंद होने के साथ ही फिर सालभर का इंतजार
29 जुलाई की रात 12 बजे जैसे ही दिन समाप्त होगा, नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट बंद कर दिए जाएंगे। इसके साथ ही श्रद्धालु अगली नाग पंचमी तक भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन की प्रतीक्षा में रह जाएंगे।
साल में एक बार ही क्यों खुलता है नागचंद्रेश्वर मंदिर? जानिए इसके पीछे की पौराणिक मान्यता
उज्जैन स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर साल में केवल एक बार नाग पंचमी के दिन ही खुलता है, और इसके पीछे एक पौराणिक मान्यता है। कहा जाता है कि सर्पराज तक्षक ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की थी, जिससे प्रसन्न होकर शिव ने उन्हें अमरत्व का वरदान दिया। तक्षक नाग ने शिव से महाकाल वन (वर्तमान उज्जैन) में वास की अनुमति मांगी, लेकिन शर्त रखी कि उनका एकांत भंग न हो। शिव ने यह शर्त स्वीकार कर ली, तभी से परंपरा बन गई कि नागराज तक्षक के सम्मान में यह मंदिर पूरे साल बंद रहता है और केवल नाग पंचमी के दिन ही उनके दर्शन के लिए पट खोले जाते हैं। मान्यता है कि इस दिन नाग देवता की पूजा करने से कालसर्प दोष, पितृदोष और सर्प भय से मुक्ति मिलती है।


