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August 13, 2022
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पाकिस्तान में स्वास्थ्यकर्मियों ने पोलियो, कोविड वैक्सीन अभियान के बहिष्कार की घोषणा की

हमजा अमीर

पेशावर, 5 जुलाई (आईएएनएस)। पोलियो टीकाकरण अभियान के दौरान अज्ञात हमलावरों द्वारा पोलियो स्वास्थ्य कार्यकर्ता और कम से कम दो सुरक्षा अधिकारियों की गोली मारकर हत्या करने के बाद, खैबर पख्तूनख्वा (केपी) के उत्तरी वजीरिस्तान जिले में पोलियो और कोरोनावायरस के टीके लगाने के लिए अधिकृत किए गए 2,000 से अधिक स्वास्थ्य कर्मचारियों ने सरकार द्वारा उन्हें प्रदान की गई सुरक्षा की कमी के कारण अभियान का बहिष्कार करने की घोषणा की है।

सैकड़ों स्वास्थ्यकर्मी, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और पोलियो टीकाकरण अभियान के सदस्यों ने मिरानशाह प्रेस क्लब के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और काम में जुटे अपने अपने स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और टीकाकरण करने वालों को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करने की मांग की, जो उत्तरी वजीरिस्तान जैसे सुरक्षात्मक दृष्टि से जोखिम वाले क्षेत्रों में टीकाकरण अभियान के लिए घर-घर जाते हैं।

प्रदर्शनकारियों ने सरकार विरोधी नारे लगाए और हमलावरों द्वारा लक्षित (टारगेट) तरीके से मारे गए और घायल स्वास्थ्य कर्मियों के लिए सुरक्षा और मुआवजे की मांग की।

एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “हम उन क्षेत्रों में काम करते हैं, जो पोलियो और कोरोनावायरस स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के लिए अत्यधिक संवेदनशील और खतरनाक रहे हैं। हमारे स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं पर कई बार हमला किया गया, उन्हें निशाना बनाया गया, मार डाला गया और हमला किया गया। सरकार हमें पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करने में विफल रही है और उन लोगों को मुआवजा देने में भी विफल रही है जिन्होंने अतीत में कर्तव्य निभाते हुए अपना जीवन कुर्बान कर दिया है।”

विरोध प्रदर्शन करने वाले स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने ‘पोलियो कार्यकर्ता का विरोध’, ‘शहीदों और घायलों के लिए मुआवजे की घोषणा’ जैसे नारों के साथ तख्तियां ले रखी थीं। इस दौरान उन्होंने अपनी मांगों के पक्ष में नारे लगाए और सरकार की ओर से कोई कदम उठाए जाने तक पोलियो और कोरोनावायरस टीकाकरण अभियान का बहिष्कार करने का संकल्प लिया।

ऑल पैरामेडिक्स के अध्यक्ष मलिक जलालुद्दीन ने कहा, “हमारी जिम्मेदारी पोलियो के टीके लगाने की है और सरकार की जिम्मेदारी कानून और व्यवस्था बनाए रखने की है। पुलिस और जिला प्रशासन हमलावरों को गिरफ्तार करने में विफल रहे हैं और पोलियो कार्यकर्ताओं की रक्षा करने में भी विफल रहे हैं।”

जलालुद्दीन ने कहा कि श्रमिकों की सुरक्षा और घायलों और शहीदों के लिए मुआवजे की मांग जायज मांग है, जो पिछले कुछ समय से सरकार के पास लंबित है। उन्होंने कहा कि वह अपने कार्यकर्ताओं के हजारों जीवन को जोखिम में नहीं डालेंगे और उन्हें उन लोगों की दया पर नहीं छोड़ेंगे, जो उन्हें निशाना बनाते और मारते हैं।

मलिक जलालुद्दीन ने कहा, “अगर सरकार पोलियो कार्यकर्ताओं की रक्षा नहीं कर सकती है, तो हम टीकाकरण अभियान में हिस्सा नहीं लेंगे।”

उन्होंने कहा, “हमारा बहिष्कार तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार कानून व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम नहीं उठाती।”

अफगानिस्तान के बाद पाकिस्तान एकमात्र ऐसा देश है जहां पोलियो वायरस अभी भी कायम है। अतीत में, आतंकवादी समूहों ने न केवल दर्जनों पोलियो कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया और मार डाला था, बल्कि स्थानीय लोगों को, विशेष रूप से पाकिस्तान के कबायली इलाकों में अपने बच्चों को पोलियो का टीका लगवाने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी थी।

फिलहाल, उत्तरी वजीरिस्तान जिले में टीकाकरण अभियान चलाने के लिए कम से कम 900 स्वास्थ्यकर्मी और कम से कम 1,700 वर्ग चार (ग्रुप डी) कर्मचारी हैं। हालांकि, स्वास्थ्यकर्मियों पर लक्षित हमले बेरोकटोक जारी रहने के कारण पोलियो कार्यकर्ताओं ने टीकाकरण अभियान का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया है।

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