जबलपुर।
संस्कारधानी जबलपुर में जहां एक ओर छोटे-बड़े तालाबों को संवारने और संरक्षित करने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर रांझी-खमरिया क्षेत्र स्थित मानेगांव तालाब अपनी उपेक्षा की कहानी खुद कह रहा है। वरिष्ठ समाजसेवी सुधीर दुबे (सोनू) के अनुसार, तालाब की चारों ओर की सुरक्षा मेढ़ें धंस चुकी हैं और तालाब के ऊपर बनी सड़क जगह-जगह से फट गई है, जिससे कभी भी बड़ी दुर्घटना की आशंका बनी हुई है।
तालाब के किनारे बिजली विभाग द्वारा लगाया गया ट्रांसफॉर्मर और एक ऊंचा टॉवर भी खतरे में है, क्योंकि उसके चारों ओर की मिट्टी धीरे-धीरे दबती जा रही है। अगर यह टॉवर झुक कर गिर गया, तो आसपास के घनी आबादी वाले इलाके और वहां सुबह-शाम टहलने आने वाले स्थानीय लोगों के लिए यह जानलेवा हो सकता है।
पूर्व में बोरियों में मिट्टी और रेत भरकर अस्थाई रूप से संरक्षण का प्रयास किया गया था, लेकिन 7-8 महीने बीत जाने के बाद भी कोई स्थायी सुधार कार्य नहीं किया गया। छठ पूजा के दौरान भी तालाब क्षेत्र के जीर्णोद्धार की योजना बनाई गई थी, लेकिन जमीनी स्तर पर अब तक कोई पहल नहीं हुई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की उदासीनता और लापरवाही के चलते तालाब की स्थिति दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन तब जागेगा जब कोई हादसा हो जाएगा?


