मध्यप्रदेश के जबलपुर में रहने वाले ऋषभ राजपूत और सोनाली चौकसे इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। वजह—एक खूबसूरत प्रेम कहानी, जिसे लोगों ने रंगभेद से जोड़कर ट्रोल करना शुरू कर दिया था। लेकिन इस कपल ने न तो ट्रोलिंग से डरकर पीछे कदम खींचे और न ही समाज के ताने उनकी मोहब्बत को हिला पाए। बल्कि वे खुलकर सामने आए और कहा—“हमारा प्यार रंग नहीं देखता।”
9 साल की दोस्ती, जिसने बनाई गहरी समझ
साल 2014 में सोनाली ने हवाबाग कॉलेज में फर्स्ट ईयर में एडमिशन लिया। इसी दौरान उसकी मुलाकात अपने सहपाठी ऋषभ राजपूत से हुई। दोस्ती कुछ ही समय में इतनी गहरी हो गई कि सोनाली का ऋषभ के घर तक आना-जाना शुरू हो गया। परिवार ने भी इस दोस्ती को अपनाया। लड़के की मां—जो सरकारी स्कूल में टीचर थीं—उसे काफी पसंद करती थीं।
कॉलेज लाइफ में ही दोनों ने फैसला कर लिया था कि जैसे ही नौकरी मिलेगी, वे शादी करेंगे। 2020 में दोनों को हैदराबाद की एक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी मिली और वहीं से उनके भविष्य की शुरुआत पक्की हो गई।
इंटरकास्ट और रंगभेद — दोनों को चुनौती दी
ऋषभ राजपूत राजपूत समाज से हैं, जबकि सोनाली चौकसे आदिवासी बहुल जिले डिंडौरी से ताल्लुक रखती हैं। शुरुआत में सोनाली के पिता ने इंटरकास्ट शादी का विरोध किया, लेकिन बेटी की खुशी देखकर आखिरकार मान गए।
जब दिसंबर 2025 में दोनों ने हिंदू रीति-रिवाज से शादी की, कुछ दिनों बाद उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। तभी कुछ यूज़र्स ने रंगभेद वाली टिप्पणियाँ करनी शुरू कर दीं—
“लड़के के पास सरकारी नौकरी होगी तभी ऐसी लड़की मिली होगी…”
“चार-पांच पेट्रोल पंप होंगे, तभी शादी हुई होगी…”
इन टिप्पणियों पर कपल ने साफ कहा—
“हमारी मोहब्बत रंग नहीं देखती। ट्रोल करने वालों की सोच पर हमें तरस आता है।”
साधारण परिवार, सशक्त सोच
ऋषभ के पिता प्राइवेट नौकरी में हैं और मां रिटायर्ड टीचर।
सोनाली के पिता किसान हैं और मां गृहिणी।
दोनों बेहद सामान्य परिवारों से हैं, लेकिन सोच आधुनिक और सकारात्मक।
ऋषभ का कहना है—
“लोग बाहर से क्या सोचेंगे, इससे हमें कभी फर्क नहीं पड़ा।
हमारे लिए जरूरी था—एक-दूसरे को समझना, सम्मान देना और खुश रखना।”
सोनाली बोलीं — रिश्तेदार क्या कहेंगे, यह सोचकर जिंदगी नहीं रुकती
सोनाली ने बताया कि जब उन्होंने पहली बार ऋषभ को अपने पिता से मिलवाया, तो उन्होंने इंटरकास्ट शादी होने की वजह से नाराजगी जताई। मगर जैसे ही उन्हें पता चला कि दोनों 2014 से एक-दूसरे को जानते हैं और ऋषभ अच्छी नौकरी में है, वे राज़ी हो गए।
रिश्तेदारों के ताने भी आए, लेकिन सोनाली ने स्पष्ट कहा—
“अगर हम दूसरों की सोच पर अपनी जिंदगी चलाएँगे, तो कभी खुश नहीं रह पाएंगे।”
अंत में—प्यार जीता, समाज की सोच हार गई
यह कहानी सिर्फ एक शादी की नहीं, बल्कि रंगभेद और जातिगत सोच को चुनौती देने का साहस भी है। ऋषभ और सोनाली ने साबित कर दिया—
प्यार का कोई रंग नहीं होता, कोई जाति नहीं होती, और कोई सीमा नहीं होती।
उनकी मुस्कुराहट और विश्वास ने उन सभी ट्रोलर्स को जवाब दे दिया, जिनकी सोच आज भी पुरानी है।
अगर चाहें तो मैं इस कहानी पर वीडियो स्क्रिप्ट, इंस्टाग्राम रील कैप्शन, यूट्यूब हेडलाइन या समाचार एंकरिंग स्क्रिप्ट भी तैयार कर दूँ।


