April 5, 2026
सी टाइम्स
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मध्य प्रदेश में महापौर, अध्यक्ष एवं पार्षद का चुनाव लड़ने वालों के मामलों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से

मध्य प्रदेश में महापौर, अध्यक्ष एवं पार्षद का चुनाव लड़ने वालों के मामलों की सुनवाई वीडियो काफ्रेंसिंग से

भोपाल, 19 दिसंबर। बदलते दौर में तकनीक का उपयोग कर समय और आर्थिक बचत के लिए हर तरफ नवाचार किए जाते हैं। मध्य प्रदेश के राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा महापौर, अध्यक्ष एवं पार्षद का चुनाव लड़ने वालों के व्यय संबंधी मामलों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से की जा रही है। इस दौरान 226 अभ्यर्थियो को वीसी के माध्यम से सुनवाई उपरांत निरर्हित (डिवार) किया गया है।

बताया गया है कि महापौर, अध्यक्ष एवं पार्षद का चुनाव लड़ने वालों के व्यय संबंधी मामलों की सुनवाइ के लिए अभ्यार्थियों को भोपाल आना होता था, मगर अब ऐसा नहीं है। राज्य निर्वाचन आयुक्त मनोज श्रीवास्तव ने इन अभ्यार्थियों के निर्वाचन व्यय लेखा दाखिल करने के संबंध में वीडियो काफ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई का नवाचार किया है। अब संबंधित अभ्यर्थियों को सुनवाई के लिए राज्य निर्वाचन आयोग भोपाल नहीं आना पड़ता। सुनवाई प्रत्येक गुरूवार को होती है। इससे अभ्यर्थियों के समय और धन दोनों की बचत हुई है। पूर्व में ऐसे प्रकरणों की सुनवाई राज्य निर्वाचन आयोग के मुख्यालय भोपाल में होती थी।

राज्य निर्वाचन आयुक्त श्रीवास्तव द्वारा फरवरी 2025 से अब तक वीसी के माध्यम से 411 अभ्यर्थियों की सुनवाई की जा चुकी है। भोपाल, खण्डवा, छिंदवाड़ा, मन्दसौर, धार, सतना, उमरिया, ग्वालियर, अलीराजपुर, राजगढ, नीमच, शाजापुर, डिण्डौरी, सागर एवं हरदा जिले के अभ्यार्थियों की सुनवाई की जा चुकी है। राज्य निर्वाचन आयुक्त द्वारा 97 अभ्यर्थियो के निर्वाचन व्यय लेखे सुनवाई उपरांत एवं दस्तावेज प्रमाण के आधार पर मान्य किये गए।

राज्य निर्वाचन आयुक्त द्वारा 226 अभ्यर्थियो को वीसी के माध्यम से सुनवाई उपरांत निरर्हित (डिवार) किया गया। अधिकतम पांच साल तक के लिये निरर्हित किये जाने का प्रावधान है। प्रकरणों के त्वरित निराकरण के लिये आयोग द्वारा जिले के उप जिला निर्वाचन अधिकारी (स्थानीय निर्वाचन) को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।

मध्य प्रदेश नगरपालिक निगम एवं मध्यप्रदेश नगर पालिक अधिनियम के तहत निर्वाचन व्यय लेखा प्रस्तुत किया जाना और लेखा दाखिल करने में असफलता पर निरर्हित घोषित किये जाने के प्रावधान हैं। नैर्सिंगक न्याय के आधार पर लेखा दाखिल करने में असफल अभ्यर्थियों को विलम्ब से लेखा दाखिल करने और विहित रीति में लेखा दाखिल नहीं करने वाले अभ्यर्थियों को राज्य निर्वाचन आयुक्त के समक्ष अपना पक्ष रखने का अवसर प्रदान किया जाता है।

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