जबलपुर। मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने जबलपुर प्रवास के दौरान रमनग स्थित 120 एम.एल.डी. वॉटर फिल्टर प्लांट का सघन निरीक्षण किया। प्लांट की उत्कृष्ट व्यवस्था और स्वच्छता को देखकर उपमुख्यमंत्री भावविभोर हो उठे। उन्होंने प्लांट की तुलना एक स्वच्छ घर से करते हुए कहा कि जिस तरह हम अपने घर को साफ रखते हैं, वैसे ही इस प्लांट को रखा गया है, जो कि अत्यंत “अद्भुत“ है।
मुख्यमंत्री से होगी ’जबलपुर मॉडल’ पर चर्चा
निरीक्षण के दौरान उपमुख्यमंत्री ने घोषणा की कि जबलपुर की जल प्रदाय व्यवस्था और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का प्रबंधन इतना बेहतर है कि वे इसकी चर्चा माननीय मुख्यमंत्री डॉं मोहन यादव से करेंगे। उन्होंने संकेत दिए कि जबलपुर के इस जल प्रबंधन सिस्टम को एक आदर्श मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।
तकनीकी रूप से सुदृढ़ और सुरक्षित है जल प्रदाय
महापौर जगत बहादुर सिंह “अन्नू“ ने उपमुख्यमंत्री को प्लांट की कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रमनगरा प्लांट में 500 किलोवाट के 5 पंप स्थापित हैं। सुचारू व्यवस्था के लिए 3 पंप निरंतर चलते हैं, जबकि 2 पंपों को इमरजेंसी बैकअप के तौर पर रिजर्व रखा जाता है। इस प्लांट से शहर की 28 उच्चस्तरीय टंकियों में पानी की सप्लाई होती है, जिससे सीधे तौर पर 36 वार्डों की जनता को शुद्ध पेयजल मिलता है।
गुणवत्ता की कसौटी पर खरा उतरा पानी
निरीक्षण के दौरान जल की शुद्धता पर विशेष ध्यान दिया गया। उपमुख्यमंत्री ने लैब में जाकर रॉ-वॉटर और फिल्टर प्लांट में तैयार शुद्ध जल की केमिकल और फिजिकल जांच की प्रक्रिया देखी। पिछले एक सप्ताह की टेस्ट रिपोर्ट्स का अवलोकन करने पर पाया गया कि जल की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के पूर्णतः अनुरूप है। प्लांट में स्थित प्रयोगशाला न केवल प्लांट के पानी, बल्कि शहर के विभिन्न हिस्सों से नमूने एकत्रित कर उनकी निरंतर जांच करती है।
निरीक्षण के दौरान केंट क्षेत्र के विधायक अशोक ईश्वरदास रोहाणी, निगमाध्यक्ष रिकुंज विज, कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह, निगमायुक्त रामप्रकाश अहिरवार, पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय सहित विभाग के सहायक यंत्री संदीप जायसवाल, खम्परिया व अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।


