जबलपुर। मकर संक्रांति के पावन पर्व के अवसर पर जबलपुर के प्रसिद्ध तिलवारा घाट में आस्था और श्रद्धा का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। पर्व के दूसरे दिन भी तिलवारा घाट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ सुबह से ही स्नान और दान-पुण्य के लिए उमड़ पड़ी। मां नर्मदा के पावन तट पर हजारों श्रद्धालुओं ने नर्मदा स्नान कर तिल दान, कंबल दान एवं अन्य पुण्य कर्म किए।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, तिलवारा घाट का विशेष महत्व है। कहा जाता है कि मकर संक्रांति के दिन स्वयं भगवान भोलेनाथ ने यहां तिल का दान किया था, जिसके कारण इस घाट का नाम तिलवारा पड़ा। इसी आस्था के चलते हर वर्ष मकर संक्रांति पर यहां विशाल धार्मिक मेला लगता है, जो सदियों से निरंतर चला आ रहा है।
सनातन परंपरा में मकर संक्रांति को अत्यंत शुभ पर्व माना गया है। इस दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर गमन करता है, जिसे पुण्यकाल कहा जाता है। शास्त्रों में इस दिन दान देने का विशेष महत्व बताया गया है। इसी कारण श्रद्धालुओं ने तिल के लड्डू, अन्न, वस्त्र एवं कंबल का दान कर पुण्य अर्जित किया।
श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा की विधिवत पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की। घाट पर भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं का कहना है कि तिलवारा घाट में मकर संक्रांति का मेला लगभग 1100 से 1200 वर्षों से आयोजित होता आ रहा है, जो इसकी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता को दर्शाता है।
आयोजकों के अनुसार, मकर संक्रांति का पुण्यकाल रात्रि 9 बजे तक रहेगा, जिसके चलते देर शाम तक श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहेगा। प्रशासन द्वारा भी घाट पर सुरक्षा और व्यवस्थाओं के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।


