तेहरान/नई दिल्ली, 24 जनवरी भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने शनिवार को तेहरान के लिए भारत सरकार के सिद्धांतों पर आधारित और पक्के समर्थन के लिए दिल से शुक्रिया जताया। दरअसल, ईरान में मानवाधिकारों की स्थिति को लेकर पश्चिमी देशों द्वारा संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में एक प्रस्ताव लाया गया। इस प्रस्ताव के खिलाफ भारत ने ईरान का समर्थन किया।
ईरानी राजदूत मोहम्मद फथाली ने एक्स पर लिखा, “मैं संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) में ईरान की इस्लामिक गणराज्य का समर्थन करने के लिए भारत सरकार के सैद्धांतिक और दृढ़ समर्थन के लिए अपनी हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करता हूं, जिसमें एक अन्यायी और राजनैतिक प्रेरित प्रस्ताव का विरोध भी शामिल है। यह रुख न्याय, बहुपक्षवाद और राष्ट्रीय संप्रभुता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”
भारत समेत ग्लोबल साउथ के कई देशों ने इसे पश्चिमी एजेंडा बताकर प्रस्ताव का विरोध किया और नो के पक्ष में वोट दिया।प्रस्ताव के पक्ष में 25 वोट, जबकि विरोध में 7 वोट मिले। इसके अलावा 14 देशों ने अपना वोट मामले से दूरी बनाते हुए एब्स्टेन में किया।
ईरान के समर्थन में भारत का ‘नो’ वाला वोट वैश्विक राजनीति की डायनेमिक्स में बड़े बदलाव का संकेत देता है। ईरान के खिलाफ इस प्रस्ताव में फ्रांस, जर्मनी, इटली, स्पेन, यूरोपीय यूनियन, ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया, अर्जेंटीना, चिली और कोस्टा रिका समेत अन्य देश हैं। ऐसे में भारत का ईरान के समर्थन में खड़ा होना दो खास बातों की ओर ध्यान खींच रहा है।
पहला कि भारत ने एक संदेश यह दिया है कि भारत कभी किसी भी देश के आंतरिक मामलों में दखलअंदाजी का समर्थन नहीं करेगा। यही भारत की विदेश नीति भी है। इसके साथ ही भारत ने अपने वोट से पश्चिमी देशों को संदेश दिया है कि वह इनके दबाव में किसी कीमत पर नहीं आने वाला।


