April 3, 2026
सी टाइम्स
प्रादेशिक

नगरपालिका ने कराया वैनगंगा नदी पर स्टापडेम निर्माण का कार्य प्रारंभ



नपाध्यक्ष ने किया निरीक्षण, नगर में जलप्रदाय के लिये होगा जलसंचय

प्रतिवर्ष की तरह नगर पालिका परिषद बालाघाट द्वारा अस्थाई स्टापडेम का निर्माण इस बार भी प्रारंभ कराया गया है। 24 जनवरी को नपाध्यक्ष श्रीमती भारती सुरजीत सिंह ठाकुर  ने स्टापडेम कार्य का निरीक्षण किया और समय पर कार्य को पूर्ण किये जाने के निर्देश दिये। इस दौरान उपाध्यक्ष श्री योगेश बिसेन, सभापति कमलेश पांचे, इंजीनियर ज्योति मेश्राम, जल शाखा प्रभारी शिव तथा कर्मचारियों की उपस्थिति रही।

सिंचाई विभाग के नियमों के अनुरूप होता है स्टापडेम

नपाध्यक्ष भारती सुरजीतसिंह ठाकुर ने बताया कि नागरिकों के द्वारा सुझाव दिया जा रहा था कि जल्दी स्टापडेम का निर्माण क्यों नहीं किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यह तकनीकी रूप से जांच-परखने के बाद ही किया जाता है जब तक नदी की धार कम नहीं होती है तब तक बंधान का कार्य किया जाना संभव नहीं होता है। चूँकि बैनगंगा नदी स्थित भीमगड़ बांध से सिंचाई के लिये पानी छोड़ा जाता है जिससे नदी के धार तेज हो जाती है जिसके परीक्षण के उपरांत नदी का प्रवाह कम होने पर स्टापडेम निर्माण प्रारंभ कराया गया है। नपाध्यक्ष ने बताया कि कई लोगों द्वारा स्थाई स्टापडेम को लेकर सुझाव दिये जाते है किंतु यह संभव नहीं है क्योंकि सिंचाई विभाग के नियमों के अनुरूप ही स्टापडेम का निर्माण करना होता है जिसे समय पर बांधना और खोलना भी आवश्यक रहता है इसलिए स्थाई स्टापडेम का निर्माण नहीं कराया जा सकता है। नपाध्यक्ष ने बताया कि यह स्‍टाप डैम में संचित होने वाले पानी से आज ना सिर्फ बालाघाट शहरी बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी पर्याप्त रूप से नदी का जल पहुंच रहा है।

जल को व्यर्थ ना बहाये-महत्व समझें-नपाध्यक्ष

निरीक्षण के दौरान नपाध्यक्ष ने जल विभाग एवं इंजीनियर्स से स्टापडेम के विषय में जानकारी ली जहां बताया गया कि स्टापडेम का निर्माण प्रारंभ हो चुका है लोगे कि प्लेट फंसाकर बोरियां रखी जा रही है और नियमिति रूप से काम चलेगा। जिसपर नपाध्यक्ष ने समय से स्टापडेम कार्य को पूर्ण किये जाने के लिये निर्देशित किया। इस दौरान नगरवासियों से अपील करते हुए नपाध्यक्ष ने कहा कि जल हमारे जीवन की अहम उपयोगिता है इसका संरक्षण करना सभी की जिम्मेदारी है। अनावश्यक जल को व्यर्थ ना बहाये बल्कि इसका महत्व समझें और जागरूकता तथा छोटे-छोटे प्रयासों से जल संचय किया जा सकता है। जबकि नपाध्यक्ष ने नवीन भवन निर्माण कार्य में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग को लेकर भी आग्रह किया। जल ही जीवन है जल है तो कल है।

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