April 9, 2026
सी टाइम्स
अंतरराष्ट्रीय

क्यों बढ़ रही है अमेरिका में महंगाई? फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने बताई असली वजह



वाशिंगटन, 29 जनवरी  अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने कहा कि अमेरिका में बढ़ती महंगाई की मुख्य वजह लोगों की ज्यादा मांग नहीं, बल्कि आयातित सामान पर लगाए गए टैरिफ हैं। उनका यह आकलन ऐसे समय आया है, जब दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाएं अमेरिकी व्यापार नीति और उसके वैश्विक असर पर नजर बनाए हुए हैं।

बुधवार (स्थानीय समय) को पॉवेल ने कहा, “महंगाई के ये ऊंचे आंकड़े ज्यादातर वस्तु क्षेत्र में बढ़ी कीमतों को दिखाते हैं और यह बढ़ोतरी टैरिफ के असर से हुई है।” उन्होंने यह भी कहा कि सेवाओं के क्षेत्र में कीमतों का दबाव धीरे-धीरे कम हो रहा है।

इसी बैठक में फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (एफओएससी) ने ब्याज दरों को फिलहाल 3.5 से 3.75 प्रतिशत के दायरे में ही बनाए रखने का फैसला किया। पॉवेल ने कहा कि मौजूदा नीति उचित है, क्योंकि महंगाई अभी भी फेड के 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है।

पॉवेल के मुताबिक, टैरिफ का ज्यादातर असर अब अर्थव्यवस्था में दिख चुका है। उन्होंने कहा, “इसका बड़ा हिस्सा गुजर चुका है। टैरिफ आम तौर पर एक बार की कीमत बढ़ोतरी की तरह होते हैं। टैरिफ से जुड़ी महंगाई धीरे-धीरे उच्चतम स्तर पर पहुंचकर बाद में कम हो सकती है।

उन्होंने बताया कि जहां व्यापार उपायों के कारण वस्तुओं की कीमतें बढ़ी हैं, वहीं सेवाओं में एक अलग रुझान दिख रहा है। सेवाओं के क्षेत्र में महंगाई में कमी का सिलसिला जारी है।

महंगाई के आंकड़ों पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि दिसंबर तक के 12 महीनों में कोर पीसीई (व्यक्तिगत उपभोग व्यय) महंगाई 3.0 प्रतिशत रही, जबकि कुल पीसीई महंगाई 2.9 प्रतिशत दर्ज की गई। उन्होंने यह भी कहा कि लोगों और बाजारों की महंगाई को लेकर उम्मीदें फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं और ज्यादातर दीर्घकालिक अनुमान फेड के 2 प्रतिशत लक्ष्य के अनुरूप हैं।

पॉवेल ने कहा कि फेडरल रिजर्व बैंक यह बारीकी से देख रहा है कि टैरिफ से जुड़ी कीमतों में बढ़ोतरी आगे कैसे बदलती है। उनका अनुमान है कि अगर कोई नया बड़ा टैरिफ नहीं लगाया गया, तो वस्तुओं में महंगाई पहले चरम पर पहुंचेगी और फिर धीरे-धीरे नीचे आने लगेगी।

भविष्य की नीति पर उन्होंने साफ किया कि फेडरल रिजर्व बैंक की कोई तय समय-सारिणी नहीं है। मौद्रिक नीति किसी तय रास्ते पर नहीं चल रही है। हम हर बैठक में हालात देखकर फैसला करेंगे।

अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर बोलते हुए पॉवेल ने कहा कि विकास की रफ्तार मजबूत है। उपभोक्ता खर्च मजबूत बना हुआ है और व्यवसायों का निवेश बढ़ रहा है, हालांकि हाउसिंग सेक्टर अभी कमजोर है।

उन्होंने यह भी माना कि हाल के महीनों में महंगाई में सुधार की गति थोड़ी थमी है, लेकिन यह तस्वीर पूरी तरह मांग से जुड़ी नहीं है। अगर यह टैरिफ की वजह से नहीं होता, तो इसे मांग से जुड़ा माना जाता, और मांग से पैदा हुई महंगाई को काबू में करना कहीं ज्यादा मुश्किल होता।

अमेरिका भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है। ऐसे में अमेरिकी व्यापार नीति और महंगाई के रुझान का असर वैश्विक सप्लाई चेन, निर्यात की कीमतों और निवेश के प्रवाह पर भी पड़ता है। आमतौर पर केंद्रीय बैंक टैरिफ से बढ़ी कीमतों को अस्थायी मानते हैं, जब तक कि वे लंबे समय की महंगाई की उम्मीदों को न बदल दें।

अन्य ख़बरें

भारत ने एक साथ उड़ाई 10 मिसाइलें, घबराए कई देश!

Newsdesk

ईरान से बात मनवाने के लिए आखिर अमेरिका ने पाकिस्तान का क्यों लिया सहारा? ये थी रणनीति

Newsdesk

डिज्नी में 1,000 कर्मचारियों की नौकरी पर संकट, मार्केटिंग डिवीजन के सबसे ज्यादा प्रभावित होने की संभावना: रिपोर्ट

Newsdesk

Leave a Reply

Discover more from सी टाइम्स

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading