जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय परिसर में स्थित स्वास्थ्य केन्द्र पिछले दो वर्षों से बिना डॉक्टर के संचालित हो रहा है। सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिस स्वास्थ्य केन्द्र में डॉक्टर ही नहीं हो, वहां मरीजों को कैसी चिकित्सा सुविधा मिल रही होगी। वर्तमान स्थिति यह है कि यहां इलाज के नाम पर केवल क्लर्क और प्यून ही मौजूद रहते हैं, जिनके भरोसे सैकड़ों छात्रों और कर्मचारियों की सेहत टिकी हुई है।
विश्वविद्यालय परिसर में महिला एवं पुरुष छात्रावास इसी स्वास्थ्य केन्द्र पर निर्भर हैं, लेकिन जब कोई छात्र बीमार पड़ता है या दुर्घटना का शिकार होता है, तो डॉक्टर न होने के कारण प्राथमिक उपचार तक नहीं मिल पाता। कई बार मरीजों को देखकर कर्मचारी खुद ही बचते नजर आते हैं, जिससे स्थिति और भी गंभीर हो जाती है।
बताया जाता है कि स्वास्थ्य केन्द्र में पहले दो डॉक्टर पदस्थ थे, जिनमें से एक वर्ष 2023 और दूसरे 2024 में सेवानिवृत्त हो गए। तब से अब तक कोई नया डॉक्टर नियुक्त नहीं किया गया। फिलहाल केवल एक होम्योपैथी डॉक्टर सप्ताह में एक-दो दिन आते हैं, जो पर्याप्त नहीं है। पहले एक आयुर्वेदिक डॉक्टर भी थे, लेकिन उनके निधन के बाद वह पद भी खाली हो गया।
स्वास्थ्य केन्द्र में दवाओं और सामग्री की खरीदी होती है, लेकिन कर्मचारियों को यह तक जानकारी नहीं है कि आखिरी बार दवाएं कब खरीदी गईं। इलाज न होने के बावजूद भवन के रखरखाव और कर्मचारियों के वेतन पर हर माह लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं। ऐसे में छात्र और कर्मचारी मांग कर रहे हैं कि या तो तुरंत डॉक्टरों की नियुक्ति की जाए या फिर इस स्वास्थ्य केन्द्र को बंद कर दिया जाए।


