जबलपुर। लखन घनघोरिया ने विधानसभा में पत्रकारिता एवं जनसंचार जैसे महत्वपूर्ण विषय को लेकर राज्य सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस विधायक द्वारा पूछे गए एक तारांकित प्रश्न के उत्तर में यह तथ्य सामने आया कि उच्च शिक्षा विभाग से संबद्ध शासकीय महाविद्यालयों में स्नातक या स्नातकोत्तर स्तर पर पत्रकारिता एवं जनसंचार विषय संचालित नहीं किया जा रहा है।
विधानसभा में दिए गए उत्तर में उच्च शिक्षा मंत्री ने स्वीकार किया कि इस विषय के लिए शासकीय कॉलेजों में कोई पद स्वीकृत नहीं हैं। यही कारण है कि मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की सहायक प्राध्यापक भर्ती प्रक्रिया में भी पत्रकारिता एवं जनसंचार को शामिल नहीं किया गया। इस खुलासे के बाद राज्य में मीडिया शिक्षा की स्थिति को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल मीडिया, संचार प्रबंधन और सूचना प्रौद्योगिकी के विस्तार के इस दौर में पत्रकारिता शिक्षा की उपेक्षा चिंताजनक है। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ माने जाने वाले मीडिया की आधारशिला यही विषय है, फिर भी इसे मुख्यधारा की उच्च शिक्षा से बाहर रखा जाना युवाओं के लिए सीमित अवसरों का संकेत है।
शिक्षाविदों ने यह भी कहा कि जब राज्य स्तर पर विषय के पद स्वीकृत नहीं होंगे और नियमित भर्ती में इसे स्थान नहीं मिलेगा, तो स्वाभाविक रूप से यह क्षेत्र हाशिये पर चला जाएगा। ऐसे में आवश्यकता है कि सरकार बदलते समय की मांग को समझते हुए पत्रकारिता एवं जनसंचार को उच्च शिक्षा की मुख्यधारा में समुचित स्थान दे, ताकि प्रदेश के युवाओं को प्रतिस्पर्धी मंच पर मजबूत अवसर मिल सकें।


