जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर में आयोजित कार्यपरिषद की बैठक के दौरान अभूतपूर्व हंगामा देखने को मिला। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) जबलपुर द्वारा पूर्व में प्रस्तुत 19 सूत्रीय मांगों के निराकरण न होने के विरोध में विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शन किया गया। इसी दौरान आयोजित कार्यपरिषद बैठक में मौजूद सदस्यों ने आंतरिक असंतोष और विरोध के चलते बीच बैठक से वॉकआउट कर दिया, जिससे बैठक निर्धारित एजेंडे पर आगे नहीं बढ़ सकी और अंततः भंग करनी पड़ी।
विद्यार्थी परिषद ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित किया जा रहा है। डिग्री, अंकसूची (मार्कशीट) और अन्य शैक्षणिक दस्तावेजों के लिए छात्रों को बार-बार भटकना पड़ रहा है। परीक्षाएं समयबद्ध तरीके से आयोजित नहीं हो पा रहीं तथा परीक्षा परिणामों की घोषणा में अनावश्यक विलंब हो रहा है, जिससे संपूर्ण शैक्षणिक सत्र प्रभावित हो रहा है। परिषद का कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर समन्वय के अभाव और निर्णय लेने में देरी के कारण विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली बाधित हो रही है।
बैठक के दौरान विश्वविद्यालय के ऑनलाइन सेंटर प्रभारी आर.के. गुप्ता और कार्यपरिषद सदस्य वेदप्रकाश तिवारी के बीच तीखी बहस हुई, जो ‘तू-तू, मैं-मैं’ तक पहुंच गई। इसके साथ ही UICSA विभाग की विभागाध्यक्ष ने कंप्यूटर सॉफ्टवेयर एवं अन्य तकनीकी सुविधाओं की अनुपलब्धता पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई। उनका कहना था कि बार-बार प्रशासन से अनुरोध करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है, जिससे छात्रों और पालकों को जवाब देना कठिन हो रहा है।
स्थिति तनावपूर्ण होने पर कुछ कार्यपरिषद सदस्यों ने बैठक का बहिष्कार करते हुए वॉकआउट कर दिया। कुलगुरु द्वारा सदस्यों को रोकने और समझाने का प्रयास भी किया गया, किंतु उनका आक्रोश शांत नहीं हुआ। सदस्यों ने विश्वविद्यालय में व्याप्त अराजकता, प्रशासनिक असंतुलन और शैक्षणिक गिरावट पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।
विद्यार्थी परिषद के केंद्रीय कार्यसमिति सदस्य माखन शर्मा ने कहा कि कृषि, बीसीए, एमसीए सहित विभिन्न पाठ्यक्रमों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। प्रयोगशालाओं, संसाधनों और शैक्षणिक ढांचे की कमियां छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही हैं। महानगर मंत्री आर्यन पुंज ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन की विद्यार्थियों के प्रति असंवेदनशीलता स्पष्ट है और प्रशासन के पास परिषद द्वारा उठाए गए प्रश्नों के संतोषजनक उत्तर नहीं हैं।
आज की घटना ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यशैली और आंतरिक समन्वय पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। कार्यपरिषद जैसी सर्वोच्च नीति-निर्धारण इकाई की बैठक का हंगामे के बीच भंग हो जाना विश्वविद्यालय की वर्तमान स्थिति का संकेत माना जा रहा है। परिषद और कार्यपरिषद सदस्यों ने स्पष्ट किया है कि विश्वविद्यालय में शैक्षणिक और प्रशासनिक सुधार की तत्काल आवश्यकता है।
प्रदर्शन के दौरान केंद्रीय कार्यसमिति सदस्य माखन शर्मा, महानगर मंत्री आर्यन पुंज, प्रांत सह मंत्री अनमोल सोनकर, ऐश्वर्या सोनकर, शोभित मिश्रा, अक्षत ताम्रकार, भास्कर पटेल, प्रफुल तिवारी, दिव्यांक पचौरी, लखन मांझी, आशुतोष पटेल, आयुष बारी, कृष्ण ग्वालवंश, यश पटेल, आयुष पटेल, अंकित सिंह, पुष्कर शुक्ला, सोम यादव, आदि पावर, प्रक्ष सिसोदिया, अनिकेत श्रीवास्तव, राज नेमा, आभास दुबे सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।


