जनसंपर्क कार्यालय में विधायक विवेक पटेल ने ली प्रेस वार्ता
*वारासिवनी* भाजपा सरकार के राज में पेपर माफियाओं ने पूरे देश की शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था को अपने कब्जे में ले लिया है।जिस देश में शिक्षा और परीक्षा पेपर माफियाओं के हवाले हो जाए।वहां लाखों विद्यार्थियों का भविष्य अंधकार में डूब जाता है।आखिर नीट का पेपर कैसे लीक हुआ।और वह कौन सा एजुकेशन माफिया है।जिसके तार भाजपा नेताओं के साथ केंद्र सरकार तक जुड़े हुए है।भाजपा सरकार के राज में कई बार पेपर लीक हो चुका है।03 मई को होने वाली नीट पेपर को रद्द कर दिया गया।जिससे लगभग 22 लाख विद्यार्थियों का भविष्य पर अंधकार के बादल छा गए है।नई तारीख कब तक आएगी।क्या दुबारा आवेदन या फीस नहीं देनी होगी।सरकार को इस पर छात्रहित में गम्भीर चिंतन और उनका निवारण करना चाहिए।पेपर कैसे लीक होता है।कैसे बिक जाता है।इस पर सरकार को कठोर कार्यवाही करनी चाहिए।यह उद्बोधन विधायक विवेक विक्की पटेल ने जनसंपर्क कार्यालय में प्रेस वार्ता के दौरान कही।इस दौरान ब्लॉक अध्यक्ष सुनील राणा,युवा विधानसभा अध्यक्ष टिकेंद्र पटले,विधायक प्रतिनिधि गगन बिसेन,राजकुमार चौधरी,देवी लिलहारें,शैलेन्द्र पटेल,संदेश बिसेन,सत्तू बिसेन,अनिल गौतम सहित काग्रेजन मौजूद रहे।
*गेहूं खरीदी में स्लॉट नहीं हो रहे बुक*
चुनाव के दौरान भाजपा नेताओं द्वारा इकतीस सौ रुपए प्रति क्विंटल धान खरीदने का भरोसा किसानों को दिया गया था।सरकार बनने के बाद भी आज तक इकतीस सौ रुपए में धान नहीं खरीदा जा रहा है।वही सर्मथन मूल्य पर बेची जाने वाली फसलों के विक्रय स्लॉट बुक नहीं हो रहे है।जिससे गेहूं,चना की उपज को समय पर विक्रय नहीं किया जा रहा है।और सरसो की उपज को खरीदने की बात करके अब तक खरीदी नहीं हो रही है।
*रेत का ठेका नहीं होने के चलते हितग्राही हो रहे परेशान*
बालाघाट जिले में रेत का ठेका नहीं होने के कारण प्रधानमंत्री आवास,सांसद निधि और विधायक निधि से ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाले विकास कार्य नहीं हो पा रहे है।जिससे जनता को रेत के लिए परेशान होना पड़ रहा है।ग्रामीण क्षेत्र के रहवासी अपना कच्चा मकान तोड़कर झोपड़े में रहकर निवास के रहे है ऐसे में उन्हें मकान बनवाने रेत नहीं मिल रही है।हमने अधिकारियों से इस विषय पर चर्चा की है।अगर जल्द ही जनता को रेत नहीं मिलेगी तो हमें सड़को पर आकर आंदोलन करना पड़ेगा।
*महिला अध्यक्ष के अधिकार का हो रहा हनन*
मै विधायक हु,कार्यालय में बैठकर जनता की समस्या सुनता हु।हमारे देश में लोकतंत्र है।मैं नगर पालिका अध्यक्ष था।उसके बाद मै कभी वहां नहीं गया।हमारे नगर की जनता ने पार्षद चुने है।और पार्षदों ने अपना अध्यक्ष चुना है।मगर जिसे कोई अधिकार नहीं है।वह नगर पालिका अध्यक्ष की कुर्सी में जाकर बैठ रहे है।जिस महिला को जनता ने चुना है।उसके अधिकार को छीनकर उसकी कुर्सी में बैठ रहे है।क्या हमारी नगर पालिका अध्यक्ष सक्षम नहीं है।जनता की समस्याओं का समाधान करे।जो किसी पद पर नहीं है उसे अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठने का क्या अधिकार है।ना ही पार्षद है,और ना ही एल्डर मेन है।ये एक महिला के अधिकार का हनन करना है।चार वर्षों तक कभी जनता दरबार नहीं लगा उन्हें पता चल रहा है कि अब नगर पालिका की गद्दी खसकने वाली है।इसलिए अब जनता की याद आ रही है।
*वारासिवनी नगर पालिका में चर रही भर्राशाही*
इस समय नगर की जनता के कुछ भी काम नहीं हो रहे है।व्यापारी जब किसी काम से नगर पालिका पहुंचता है तो उससे पैसे की मांग की जाती है।कुछ दिन पूर्व नगर पालिका में पैसे की लेन देन को लेकर परिषद के अंदर कार्यकर्ताओं का विवाद भी हुआ था।भाजपा सरकार महिलाओं के सम्मान की बात करती है।मगर हमारे क्षेत्र में महिला जनप्रतिनिधि को सम्मान नहीं मिल रहा है।नगर पालिका कौन चला रहा है समझ नहीं आता।नपा अध्यक्ष आज तक किसी भी वॉर्ड में जनता की समस्या सुनने नहीं पहुंची।जिससे नगर की जनता का अब नगर पालिका के प्रति विश्वास खत्म हो रहा है।
*सीएम राइज स्कूल में नही मिल रहा प्रवेश*
बच्चों को अच्छी शिक्षा प्रदान करने की बड़ी-बड़ी बाते सरकार करती है।मगर हकीकत में शिक्षा का क्या हाल है।किसी से छुपाया नहीं जा सकता है।जब ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थी 5 वी क्लास पास करके सीएम राइज स्कूल में प्रवेश के लिए जा रहा है।तो उसे एडमिशन नहीं मिल रहा है।इस मंहगाई के दौर में गरीब घर का छात्र कैसे प्राइवेट स्कूल में पढ़ाई करेगा।सरकार को इसकी चिंता नहीं है।


