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एसएसआर की मौत का ‘रहस्य’ एक साल बाद भी नहीं सुलझा

मुंबई, 14 जून (आईएएनएस)| लगभग एक अंतहीन डेली सोप की तरह, बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत एक ‘रहस्य’ बनी हुई है। एक साल बाद भी उनकी मौत की वजह पता नहीं चल पाई है। 14 जून, 2020 को, महामारी प्रेरित लॉकडाउन में 34 वर्षीय सुशांत, जिसने ‘एमएस धोनी द अनटोल्ड स्टोरी’ (2016), ‘केदारनाथ’ (2018) और ‘छिछोरे’ (2019) जैसी फिल्मों के साथ दर्शकों को आकर्षित किया। कथित तौर पर मोंट ब्लांक अपार्टमेंट में अपने किराए के घर में पंखे से लटके हुए पाए गए थे।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) जैसी कई जांच एजेंसियां उस कड़ाही में कूद गईं, जिसमें बॉलीवुड के एक दिलचस्प पॉटबॉयलर साजि़श, प्यार का नशा, गर्लफ्रेंड, धोखा, ड्रग्स, समलैंगिकता के संकेत, कथित बड़े पैसे का घोटाला, नापाक लिंक, आदि शामिल था।

एक साल बाद भी सोशल मीडिया प्रशंसकों की यादों, श्रद्धांजलि और न्याय की मांगों से भरा हुआ है। वहीं सत्तारूढ़ एमवीए सहयोगी शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, कांग्रेस के नेताओं ने सीबीआई और केंद्र की निंदा की है।

शिवसेना प्रवक्ता और सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि सुशांत प्रकरण इस बात की जांच के बारे में नहीं था कि क्या गलत हुआ है, बल्कि (एमवीए) सरकार को परेशान करने, आक्षेप लगाने, एक धब्बा अभियान शुरू करने के बारे में था, क्योंकि बहुत सारी कहानियां सामने आई जो नकली थी।

राकांपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और मंत्री नवाब मलिक ने इसे महाराष्ट्र सरकार को बदनाम करने के लिए रची गई साजिश करार दिया और मांग की कि अगर सुशांत ने आत्महत्या नहीं की तो सीबीआई को यह खुलासा करना चाहिए कि उसका हत्यारा कौन है।

कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा कि सीबीआई द्वारा जांच शुरू किए 310 दिन हो चुके हैं और 250 दिन हो गए हैं जब एम्स पैनल ने हत्या से इंकार कर दिया था। एजेंसी अंतिम निष्कर्ष कब घोषित करेगी? सीबीआई ने इस पर ढक्कन क्यों रखा है? सीबीआई अपने राजनीतिक आकाओं के भारी दबाव में है।

वहीं चतुर्वेदी ने कहा कि एक साल के बाद, कोई नहीं जानता कि सीबीआई जांच का क्या हुआ। यह सुशांत को न्याय दिलाने के लिए नहीं था, बल्कि एक ऐसे मुद्दे पर सरकार को निशाना बनाने के लिए था, जो स्पष्ट रूप से एक खुला मामला था।

मलिक ने कहा कि मुंबई पुलिस सुशांत की आत्महत्या के मामले की जांच कर रही थी, लेकिन राजनीतिक कारणों से बिहार सरकार ने मामला दर्ज कर सीबीआई को सौंप दिया। अब सीबीआई को खुलासा करना चाहिए कि उसे किसने मारा।

सीबीआई ने सुशांत के परिवार के सदस्यों और अन्य गवाहों के बयान दर्ज किए, जबकि रिया ने तर्क दिया कि दिवंगत अभिनेता ड्रग्स लेते थे और कुछ मानसिक स्वास्थ्य मुद्दों के लिए उनका इलाज किया जा रहा था।

टीवी शो की तरह लगभग रोजाना ताजा खुलासे का लुत्फ उठाते हुए भाजपा के राज्य नेताओं ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और उनके बेटे और पर्यटन मंत्री आदित्य ठाकरे पर तंज कसने का भी कोई मौका नहीं छोड़ा।

बाद में, बिहार चुनावों में, सुशांत की मौत एक राजनीतिक झटका साबित हुई और एम्स, नई दिल्ली ने किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया, यह मानते हुए कि उनकी मौत फांसी से हुई थी।

अब गेंद सीबीआई के पाले में है कि सुशांत के अंत पर अंतिम फैसला क्या हो।

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