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मप्र में बिजली कटौती पर सियासी संग्राम

भोपाल, 1 सितम्बर (आईएएनएस)| मध्य प्रदेश में बीते कुछ दिनों से जारी बिजली की अघोषित कटौती ने सियासी रंग ले लिया है। इस मुद्दे पर कांग्रेस हमलावर है तो वहीं सरकार के लोगों में ही मतभिन्नता सामने आ रही है। कुल मिलाकर बिजली कटौती ने कांग्रेस केा हमले करने का मौका दे दिया है। राज्य में पिछले कुछ अरसे से बिजली कटौती का दौर जारी है। यही कारण है कि भाजपा के ही देा विधायकों ने इस मसले को उठाया। एक विधायक ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को न केवल पत्र लिखा , बल्कि अन्य विधायक ने आंदेालन तक की धमकी दे डाली है। इसके बाद तेा कांग्रेस ने हमलावर रूख अपना लिया है।

बिजली कटौती के लग रहे आरोपों के बीच ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा है कि वर्तमान में प्रदेश में बिजली की मॉंग की तुलना में पर्याप्त विद्युत उत्पादन है। प्रदेश में कहीं पर भी विद्युत उपलब्धता की कमी के कारण विद्युत कटौती नहीं हो रही है।

तोमर ने कहा है कि विगत दिनों 27 अगस्त की शाम से लगभग तीन दिन विद्युत की मॉंग मे अप्रत्याशित वृद्धि एवं कम उत्पादन की स्थिति निर्मित हुई थी। अत: अघोषित विद्युत कटौती, अंतिम विकल्प के रूप में करने की बाध्यता हुई। विद्युत उत्पादन में कमी की स्थिति देशव्यापी कोयला संकट एवं कम वर्षा के कारण बनी है। वहीं दूसरी ओर अल्प वर्षा के कारण कृषि के क्षेत्र में विद्युत मॉंग में अप्रत्याशित वृद्धि हुई।

दूसरी ओर राज्य के गृहमंत्री डा नरोत्तम मिश्रा बिजली संकट की बात मानते हैं। उनका कहना है कि, प्रदेश में बिजली की समस्या स्थायी नहीं है। बिजली संयंत्रों में कोयला की सप्लाई बाधित होने और बारिश की कमी से तकनीकी दिक्कतें आई हैं। सरकार जल्द ही पहले की तरह बिजली की सुचारु आपूर्ति बहाल करने का प्रयास कर रही है।

इतना ही नहीं राज्य की केबिनेट बैठक में भी बिजली कटौती का मुददा उठा। सूत्रों के मुताबिक, मंत्रियों ने यहां तक कह दिया कि आम लोग बिजली चाहते हैं, उनको कटौती बर्दाश्त नहीं है क्योंकि पूरे समय बिजली की आदत जो हो गई है। उपभोक्ता केा चाहे महंगी बिजली मिले मगर उसे तो बिजली चाहिए।

कांग्रेस इस बिजली कटौती पर हमलावर है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के प्रदेषाध्यक्ष कमल नाथ ने बिजली कटौती पर कहा, कि पूरे प्रदेश में बिजली की अघोषित कटौती जारी है। ग्रामीण क्षेत्रों व कृषि क्षेत्रों में घंटो बिजली गायब रहती है। कई हिस्से घंटो अंधेरे में, प्रदेश में कोयले का भी भारी संकट है, उत्पादन प्रभावित हो रहा है, माँग व आपूर्ति में भारी अंतर लेकिन इन सब बातों से बेखबर जिम्मेदार सच्चाई स्वीकारने की बजाय अभी झूठ परोस रहे है। कह रहे है कि प्रदेश में कोई बिजली संकट नहीं है।

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