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January 29, 2022
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इमरान के कार्यकाल में डॉलर के मुकाबले 70 प्रतिशत गिरा पाकिस्तानी रुपया

नई दिल्ली, 20 दिसम्बर। अगस्त 2018 में प्रधान मंत्री इमरान खान के सत्ता संभालने के बाद से पिछले तीन वर्षों में पाकिस्तान का रुपया 70 प्रतिशत से अधिक गिर गया है।

सऊदी अरब से हाल ही में 3 अरब डॉलर के ऋण के बाद, देश के नीति निर्माता अब अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से अपेक्षित सहायता पर अपनी उम्मीदें टिका रहे हैं।

नीति निर्माताओं को आश्चर्य इस तथ्य से हुआ है कि सऊदी अरब से हाल ही में ऋण के बावजूद पाकिस्तानी रुपया लगातार कमजोर हो रहा है।

द न्यूज इंटरनेशनल ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है, हाल के दिनों में यह स्पष्ट हो गया है कि स्टेट बैंक के भंडार को मजबूत करने के लिए सऊदी ऋण में तीन अरब अमेरिकी डॉलर के आगमन या ऋण को फिर से शुरू करने के लिए पाकिस्तान और आईएमएफ अधिकारियों के बीच एक स्टाफ एग्रीमेंट रुपये पर जारी दबाव को रोकने में व्यावहारिक रूप से विफल रहा है।

एक बेलआउट पैकेज के हिस्से के रूप में, 2019 में आईएमएफ ने संकट जैसी स्थिति में पाकिस्तान को विस्तारित फंड सुविधा (ईएफएफ) सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्धता जाहिर की थी।

अगस्त 2018 में जब खान को प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया था, तब रुपया लगभग 107 रुपये प्रति डॉलर पर कारोबार कर रहा था, जबकि फिलहाल यह गिरकर एक डॉलर के मुकाबले 178 पर पहुंच चुका है। यह क्रिकेट से राजनेता बने खान के लिए दो साल में चुनावों का सामना करने को लेकर बहुत चिंता का विषय बन चुका है।

विश्लेषकों ने इंडिया नैरेटिव को बताया कि देश की मुद्रा का लगातार गिरना आर्थिक चुनौतियों की तुलना में बड़ी राजनीतिक समस्याओं का प्रतिबिंब हो सकता है।

अनिश्चितता ने देश के व्यापारिक समुदाय को भी प्रभावित किया है।

एक ओर जहां इस्लामाबाद इस आर्थिक गड़बड़ी के लिए बाहरी कारणों को जिम्मेदार ठहरा रहा है, वहीं अधिकांश पाकिस्तानियों को लगता है कि वर्तमान स्थिति सरकार की नीतियों के गलत संचालन के कारण बनी हुई है।

उन्होंने कहा, देश की आर्थिक चुनौतियां तेजी से बढ़ी हैं और अब यह देश को लगभग हर प्रकार से प्रभावित कर रहा है। बड़े सुधार दिन की जरूरत है, लेकिन यह प्राथमिकता के रूप में प्रतीत नहीं हो रहा है, क्योंकि सरकार अब तक अर्थव्यवस्था के अलावा अन्य मुद्दों में ही व्यस्त रही है।

किसी देश की मुद्रा का मूल्य राजनीतिक और मौद्रिक नीतियों में स्थिरता को भी दिखाता है, जो निवेश आकर्षित करते हैं। कुल मिलाकर आर्थिक विकास और निवेश की आमद – विदेशी और घरेलू – मुद्रा को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। लेकिन अब जब देश के पंजाब प्रांत में एक खेल उपकरण कारखाने में लगे श्रीलंकाई नागरिक की निर्मम हत्या ने सुर्खियां बटोरीं हैं, तो खान सरकार के लिए हालात और खराब हो गए हैं।

देश की महंगाई भी नवंबर में बढ़कर 11.5 फीसदी हो गई है – इस साल सबसे ज्यादा – जिसने आम लोगों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है।

रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के सोशल मीडिया फीड युवाओं की टिप्पणियों से भरे हुए हैं, जो नफरत का प्रचार कर रहे हैं और दूसरों को भी ऐसा करने के लिए कह रहे हैं। क्या होगा यदि अगला शिकार (निर्मम हत्या) किसी अन्य मित्र देश का हो? पाकिस्तान में निवेश करने पर कौन विचार करेगा, जब लिंचिंग का खतरा बड़ा हो?

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