Shekhar kapur – मशहूर फिल्म निर्माता शेखर कपूर ने उस समय की एक भावुक याद साझा की जब उनकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराही गई फिल्म ‘एलिज़ाबेथ’ को आठ ऑस्कर नामांकन मिले थे।
इंस्टाग्राम पर ऑस्कर ट्रॉफी की एक तस्वीर साझा करते हुए शेखर कपूर ने अपने पिता से जुड़ी एक दिल को छू लेने वाली “मिडिल क्लास” बातचीत का ज़िक्र किया, जो उनके पिता के ज़मीन से जुड़े दृष्टिकोण को दर्शाती है — भले ही उन्हें वैश्विक पहचान क्यों न मिल रही हो।
कपूर ने लिखा,
“मैं बहुत मिडिल क्लास हूं। और मिडिल क्लास होने का बोझ हमेशा से मेरे साथ रहा है, जिससे मुझे लगातार लड़ना पड़ा। वो मिडिल क्लास मूल्य, जिन्हें कभी बहुत ऊंचा माना जाता था, आज की दुनिया में एक बोझ बन गए हैं।”
उन्होंने आगे लिखा,
“‘कभी उधार मत लेना, कभी किसी का कर्ज मत लेना!’ ‘एक स्थिर नौकरी पकड़ लो। पेंशन के लिए तैयारी करो।’ — बस, इससे तो कोई स्टार्टअप का सपना भी बाहर हो गया। लेकिन यही मिडिल क्लास सोच मेरे लिए फायदेमंद भी रही। मुझे बगावत करने का एक ठोस कारण मिल गया। क्योंकि रचनात्मकता तो बगावत से ही जन्म लेती है। और मेरा जीवन कई बगावतों की कहानी है… मिडिल क्लास सोच के खिलाफ। हालांकि, एक बात मैं कभी नहीं भूल सकता, जो मेरे पिता ने कही थी — ‘बेटा, पैसा कमाना आसान है, इज्जत कमाना बहुत मुश्किल।’ इसलिए कुछ मूल्य अब भी मुझमें हैं… परिवार के प्रति जिम्मेदारी का भाव।”
शेखर कपूर ने उस यादगार बातचीत को भी साझा किया, जब उन्होंने पहली बार अपने पिता को ऑस्कर नामांकन की खबर दी थी। उन्होंने लिखा:
“जब मेरी फिल्म Elizabeth को 8 ऑस्कर नॉमिनेशन मिले (ध्यान रहे, यह मेरी वेस्ट की पहली फिल्म थी)… मैंने तुरंत अपने पिताजी को फोन किया, क्योंकि वे हमेशा मुझे फिल्म इंडस्ट्री में आने के खिलाफ थे। और फिर बातचीत कुछ इस तरह हुई:
‘डैड, मेरी फिल्म को 8 ऑस्कर नॉमिनेशन मिले हैं।’
‘हम्म… शाबाश, बेटा।’
‘उसे दुनिया की टॉप 5 फिल्मों में भी चुना गया है।’
‘तुझ पर गर्व है, बेटा।’
(एक लंबा मौन…)
‘बेटा?’
‘जी, डैड?’
‘इसका मतलब अब तुझे कोई और नौकरी मिल सकती है?’”
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शेखर कपूर का जन्म 6 दिसंबर 1945 को ब्रिटिश भारत के लाहौर (अब पाकिस्तान) में हुआ था। वे एक पंजाबी हिंदू परिवार से हैं। उनके पिता, कुलभूषण कपूर, एक प्रतिष्ठित डॉक्टर थे।
पेशेवर मोर्चे पर, शेखर कपूर ने अपने शानदार करियर में कई प्रतिष्ठित पुरस्कार जीते हैं, जिनमें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी शामिल है। मासूम, मिस्टर इंडिया, और बैंडिट क्वीन जैसी कालजयी फिल्मों से उन्होंने भारतीय और अंतरराष्ट्रीय सिनेमा में अमिट छाप छोड़ी है।


