पिछले हफ्ते भारतीय शेयर बाजारों में लगातार छठे सप्ताह गिरावट दर्ज की गई, जो पिछले पांच वर्षों में गिरावट का सबसे लंबा सिलसिला है। अमेरिका के साथ बढ़ते व्यापारिक तनाव के बीच, भारत की शीर्ष दस सबसे मूल्यवान कंपनियों में से छह का संयुक्त बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) ₹1.36 लाख करोड़ घट गया, जिसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ।
बीएसई सेंसेक्स 742 अंक (0.92%) गिरकर 79,857.79 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 202 अंक (0.82%) की गिरावट के साथ 24,363.30 पर बंद हुआ।
**दिग्गज कंपनियों को भारी नुकसान**
* **रिलायंस इंडस्ट्रीज** को सबसे ज्यादा ₹34,711 करोड़ का नुकसान हुआ, और इसका मार्केट कैप ₹18,51,175 करोड़ रह गया।
* **एचडीएफसी बैंक** का मार्केट कैप ₹29,722 करोड़ घटकर ₹15,14,304 करोड़ पर आ गया।
* **आईसीआईसीआई बैंक** का मूल्यांकन ₹24,719 करोड़ गिरकर ₹10,25,496 करोड़ हो गया।
* **इंफोसिस** का मार्केट कैप ₹19,504 करोड़ कम होकर ₹5,91,423 करोड़ रह गया।
* **भारती एयरटेल** ने ₹15,054 करोड़ गंवाए, जिससे उसका मार्केट कैप ₹10,59,850 करोड़ पर आ गया।
* **हिंदुस्तान यूनिलीवर** का मूल्यांकन ₹12,441 करोड़ घटकर ₹5,87,022 करोड़ हो गया।
**गिरावट के बीच कुछ शेयरों में तेजी**
इस बिकवाली के माहौल में भी चार कंपनियों ने बढ़त दर्ज की। भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) को सबसे अधिक ₹17,678 करोड़ का फायदा हुआ। इसके बाद टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में ₹11,361 करोड़ और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में ₹9,784 करोड़ की बढ़त देखी गई। बजाज फाइनेंस के मार्केट कैप में ₹186 करोड़ की मामूली वृद्धि हुई।
**अमेरिकी टैरिफ ने बिगाड़ा बाजार का मिजाज**
बाजार में गिरावट का मुख्य कारण अमेरिका-भारत के बीच बढ़ता व्यापारिक तनाव रहा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारतीय वस्तुओं पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगा दिया, जिससे कुल टैरिफ 50% हो गया है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के विनोद नायर के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली ने घरेलू सूचकांकों पर दबाव डाला है। FII ने अगस्त में भारतीय इक्विटी से लगभग ₹18,000 करोड़ निकाले हैं।
हालांकि, इस उथल-पुथल के बावजूद शीर्ष दस कंपनियों की रैंकिंग में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जिसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज पहले स्थान पर कायम है।


