जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शिक्षकों के लिए ई-अटेंडेंस अनिवार्य करने के राज्य सरकार के आदेश को सही ठहराते हुए गेस्ट टीचर कोऑर्डिनेशन कमेटी की जनहित याचिका खारिज कर दी। याचिकाकर्ता ने ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क कमी और कई शिक्षकों के पास स्मार्टफोन न होने को आधार बनाकर इस व्यवस्था को अव्यवहारिक बताया था।
सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता निलेश यादव ने तर्क दिया कि डिजिटल उपस्थिति से पारदर्शिता बढ़ेगी और उपस्थिति की निगरानी बेहतर होगी। मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की पीठ ने इसे सरकार का नीतिगत निर्णय बताते हुए हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।
अब 1 जुलाई 2025 से प्रदेश में शिक्षकों के लिए ई-अटेंडेंस व्यवस्था लागू होने का रास्ता साफ हो गया है। वहीं, इसी मुद्दे पर 27 शिक्षकों की अलग याचिका पर सुनवाई 7 नवंबर को होगी।


