जबलपुर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को संस्कारधानी जबलपुर में मानस भवन में आयोजित चतुर्थ वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि अनेक जन्मों के पुण्य से भारत को उसका वास्तविक स्वरूप मिला है, क्योंकि यह देश अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाली सनातन संस्कृति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जबालि ऋषि की पावन भूमि जबलपुर में अंतरराष्ट्रीय स्तर का रामायण सम्मेलन होना गौरव का विषय है, जो भगवान श्रीराम के जीवन और आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बनेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में उतारकर ही समाज और राष्ट्र का कल्याण संभव है। उन्होंने यह भी कहा कि रामराज्य की अवधारणा और श्रीराम की गाथाएं देश की सीमाओं से बाहर भी लोगों को प्रेरित करती रहेंगी। भविष्य में जबलपुर सहित अन्य स्थानों पर भी वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस आयोजित किए जाएंगे।
कार्यक्रम में जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने संसद में रामचरित मानस को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यावरण मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि भारत की आत्मा उसकी सनातन संस्कृति में निहित है और रामचरित मानस ने भारत को भारत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
इसी दिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस कन्वेंशन सेंटर परिसर में नगर निगम द्वारा विकसित गीता भवन वैचारिक अध्ययन केन्द्र का भी शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में मार्गदर्शन देने वाला महान जीवन-दर्शन है। गीता के संदेश कर्म, कर्तव्य और नैतिकता के माध्यम से समाज को सही दिशा प्रदान करते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गीता भवन जैसे वैचारिक अध्ययन केन्द्र नई पीढ़ी को भारतीय दर्शन, संस्कृति और जीवन मूल्यों से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनेंगे। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण का कार्य किया जा रहा है और नवीन शिक्षा नीति के माध्यम से प्राचीन ग्रंथों के ज्ञान को शिक्षा व्यवस्था से जोड़ा गया है।


