April 3, 2026
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सत्व, रजस या तमस : कैसा भोजन करते हैं आप? जानें क्या कहती है सिद्ध चिकित्सा



नई दिल्ली, 2 जनवरी  पुरानी कहावत है, “जैसा अन्न, वैसा मन और वैसी ही सेहत।” यानी हम जो खाते हैं, उसका असर हमारे मन और शरीर दोनों पर पड़ता है। प्राचीन सिद्ध चिकित्सा प्रणाली में भी भोजन को इसी नजरिए से देखा जाता है। इस चिकित्सा पद्धति के अनुसार भोजन तीन प्रकार का होता है, जो हमारे तीन गुणों-सत्व (उत्तम और शुद्ध), रजस (सक्रिय और उत्तेजक) और तमस (निष्क्रिय और सुस्त) को प्रभावित करता है।



केंद्र सरकार का आयुष मंत्रालय बताता है कि सही भोजन चुनकर हम अपना मन शांत, शरीर स्वस्थ और जीवन संतुलित रख सकते हैं। सिद्ध चिकित्सा के अनुसार भोजन सिर्फ पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और मन की दवा भी है। प्राचीन सिद्ध चिकित्सा प्रणाली में भोजन के तीन प्रकारों की जानकारी देता है।

सिद्ध चिकित्सा दक्षिण भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति है, जो शरीर, मन और आत्मा के संतुलन पर जोर देती है। इसमें भोजन को तीन श्रेणियों में बांटा गया है, जो मनुष्य के गुणों- सत्व (उत्तम), रजस (सक्रिय) और तमस (निष्क्रिय) को प्रभावित करते हैं।

पहला प्रकार है सत्तुवम या सत्व, जिसे उत्तम गुणों को बढ़ावा देने वाला भोजन कहा जाता है। यह सात्विक भोजन के समान है, जो शुद्ध, ताजा और प्राकृतिक होता है। इसमें ताजे फल, सब्जियां, अनाज, दूध और हल्के मसाले शामिल हैं। ऐसा भोजन मन को शांत रखता है, शरीर को पोषण देता है और एकाग्रता बढ़ाता है। सिद्ध चिकित्सा में इसे स्वास्थ्य और आध्यात्मिक विकास के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। नियमित सेवन से व्यक्ति में सकारात्मकता, शुद्धता और संतुलन आता है।

दूसरा प्रकार है इराकतम या रजस, जो सक्रिय गुणों को बढ़ावा देने वाला भोजन है। यह राजसिक भोजन की श्रेणी में आता है, जिसमें मसालेदार, तीखा, नमकीन या उत्तेजक चीजें होती हैं। जैसे प्याज, लहसुन, मिर्च, चाय-कॉफी और तले हुए पदार्थ। यह भोजन ऊर्जा प्रदान कर सक्रियता बढ़ाते है, लेकिन अधिक मात्रा में सेवन से चिड़चिड़ापन, बेचैनी या आक्रामकता आ सकती है। सिद्ध प्रणाली में इसे संतुलित मात्रा में लेने की सलाह दी जाती है।

तीसरा प्रकार है तमकम या तमस, जो निष्क्रिय गुणों को बढ़ावा देने वाला भोजन है। यह तामसिक श्रेणी का है, जिसमें बासी, भारी, प्रोसेस्ड या मांसाहारी भोजन आता है। जैसे बचा हुआ खाना, शराब, ज्यादा तला हुआ या बासी भोजन। ऐसा भोजन सुस्ती, आलस्य और मानसिक भ्रम पैदा करता है। सिद्ध चिकित्सा में इसे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताया गया है और कम से कम सेवन करने की सिफारिश की जाती है।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अपनी प्रकृति के अनुसार भोजन चुनें और सात्विक आहार को प्राथमिकता दें। भोजन को सिर्फ पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और मन की दवा माना जाता है। सत्व प्रधान आहार अपनाने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और मानसिक शांति मिलती है। आज के तनावपूर्ण जीवन में यह जानकारी बेहद जरूरी है।

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