April 6, 2026
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विश्व हिंदी दिवस : सिनेमा जगत में हिंदी साहित्य का खास योगदान, उपन्यास पर बन चुकी हैं क्लासिक फिल्में

मुंबई, 10 जनवरी  आज विश्व हिंदी दिवस मनाया जा रहा है, जो हिंदी भाषा की वैश्विक पहचान और महत्व को रेखांकित करता है। हिंदी साहित्य ने भारतीय सिनेमा को समृद्ध किया है। कई प्रसिद्ध हिंदी उपन्यासों पर आधारित फिल्में बनीं, जो आज भी दर्शकों के दिलों में बसी हैं।

यह 1978 में आई बासु चटर्जी की कॉमेडी-ड्रामा है, जो कमलेश्वर के उपन्यास ‘पति, पत्नी और वो’ पर आधारित है। फिल्म में संजीव कुमार, विद्या सिन्हा और रंजीता मुख्य भूमिकाओं में हैं। यह एक त्रिकोणीय प्रेम कहानी है, जो कॉमेडी और भावनाओं से भरी है और सामाजिक रिश्तों पर व्यंग्य करती है। नदिया के पार : गोविंद मूनिस निर्देशित यह रोमांटिक-ड्रामा फिल्म केशव प्रसाद मिश्र के उपन्यास ‘कोहबर की शर्त’ पर आधारित है। ग्रामीण पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म 1982 में सिनेमाघरों में आई थी। फिल्म में सचिन पिलगांवकर और साधना सिंह लीड रोल में हैं। फिल्म अपनी सादगी और संगीत की वजह से दर्शकों को बहुत पसंद की गई। तमस : साहित्यकार भीष्म साहनी के साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता उपन्यास ‘तमस’ पर आधारित फिल्म साल 1988 में रिलीज हुई।

गोविंद निहलानी के निर्देशन में बनी फिल्म 1947 के विभाजन के दौरान सांप्रदायिक दंगों की क्रूर सच्चाई दिखाती है। ओम पुरी और दीपा साही मुख्य भूमिकाओं में हैं। यह फिल्म विभाजन की त्रासदी को गहराई से उकेरती है। सूरज का सातवां घोड़ा : श्याम बेनेगल निर्देशित यह फिल्म धर्मवीर भारती के महान उपन्यास ‘सूरज का सातवां घोड़ा’ पर आधारित है। रजित कपूर, नीना गुप्ता और अमरीश पुरी मुख्य कलाकार हैं। यह प्रेम, यादों और जीवन की जटिलताओं की बहुस्तरीय कहानी है, जो 1992 में आई थी। मोहल्ला अस्सी : चंद्रप्रकाश द्विवेदी निर्देशित यह फिल्म काशीनाथ सिंह के उपन्यास ‘काशी का अस्सी’ पर आधारित है। यह बनारस के अस्सी घाट की सामाजिक-राजनीतिक कहानी है।

फिल्म में सनी देओल, साक्षी तंवर, रवि किशन मुख्य भूमिकाओं में हैं। यह व्यंग्यात्मक और विचारोत्तेजक है, जो साल 2018 में रिलीज हुई और खूब विवादों में रही। पिंजर : चंद्रप्रकाश द्विवेदी निर्देशित यह फिल्म अमृता प्रीतम के प्रसिद्ध उपन्यास ‘पिंजर’ पर आधारित है। 1947 के विभाजन के दौरान हिंदू लड़की पूरो का अपहरण और उसकी जिंदगी की संघर्षपूर्ण कहानी है। फिल्म में उर्मिला मातोंडकर, मनोज बाजपेयी और संजय सूरी मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म महिलाओं की पीड़ा और मानवता की खोई हुई भावनाओं को दर्शाती है और साल 2003 में रिलीज हुई थी। –

 

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