जबलपुर। बरगी बांध के समीप स्थित नंदकेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास बेहद रोचक और अनोखा है। नर्मदा नदी के किनारे स्थित यह प्राचीन मंदिर बरगी बांध के निर्माण के दौरान बैकवॉटर में डूब गया था, जिसके बाद सिंचाई परियोजना में लगातार तकनीकी और कार्यगत बाधाएँ सामने आने लगीं।
बताया जाता है कि ग्वाला टेकरी पर रहने वाले एक महात्मा के मार्गदर्शन में सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने जलमग्न मूर्तियों को बाहर निकालकर उसी टेकरी पर भव्य मंदिर का निर्माण कराया। भगवान शिव और शेषनाग की प्रतिमाओं की पुनः स्थापना के बाद ही बांध का कार्य सुचारू रूप से आगे बढ़ सका। यही कारण है कि आज भी इस मंदिर का रखरखाव मध्यप्रदेश सरकार का सिंचाई विभाग करता है।
नंदकेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण वर्ष 1982 में प्रारंभ होकर 1994 में पूर्ण हुआ। मंदिर का लोकार्पण जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती द्वारा किया गया था। पारंपरिक मंदिर स्थापत्य शैली में बने इस मंदिर से बरगी बांध का मनोरम दृश्य दिखाई देता है।
पुजारी नर्मदा प्रसाद त्रिपाठी के अनुसार, नंदकेश्वर महादेव का उल्लेख छह पुराणों में मिलता है और धार्मिक मान्यता है कि यहां गौ-हत्या व ब्रह्म-हत्या के दोष से मुक्ति हेतु विशेष पूजन किया जाता है।


