जबलपुर, अग्निबाण संवाददाता। जिले में धान खरीदी के नाम पर चल रहे कथित करोड़ों के भ्रष्टाचार और कलेक्ट्रेट के एक वरिष्ठ अधिकारी पर पांच लाख रुपये की रिश्वत लेकर फाइल दबाने के आरोप अब स्थानीय स्तर से निकलकर सीधे भोपाल तक पहुंच गए हैं। दस्तावेजों और साक्ष्यों के साथ की गई शिकायत के बाद मंत्रालय और वरिष्ठ अधिकारियों में हड़कंप की स्थिति है।
सहजपुर स्थित पारस वेयरहाउस में एसडीएम और खाद्य विभाग की संयुक्त जांच के दौरान गंभीर अनियमितताएं सामने आई थीं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि करीब 20 दिन बीत जाने के बाद भी जिम्मेदारों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जांच में पाया गया कि संस्कार महिला संगठन के नाम पर फर्जी तरीके से काम किया जा रहा था, जहां महिलाओं के स्थान पर पुरुषों से तुलाई कराई गई। इसके साथ ही लगभग 9 हजार धान की बोरियां रिकॉर्ड से गायब पाई गईं।
जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि गुणवत्ता जांच से बचने के लिए नई धान में खराब और सड़ी धान मिलाई जा रही थी। आरोप है कि इन गंभीर तथ्यों के बावजूद कार्रवाई रोकने के लिए कलेक्ट्रेट के एक अधिकारी ने मोटी रिश्वत लेकर फाइल को दबा दिया।
शिकायत के अनुसार शहपुरा, कुंडम और सिहोरा क्षेत्रों में फर्जी स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से व्यापारियों की धान को सरकारी दरों पर खपाया जा रहा है, जिससे असली किसान ठगे जा रहे हैं। मामला भोपाल पहुंचते ही कुछ राजनीतिक रसूखदारों की सक्रियता भी बढ़ गई है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या शासन सख्त कदम उठाएगा या फिर यह मामला भी प्रशासनिक सुस्ती की भेंट चढ़ जाएगा।


