जिला प्रशासन उच्च न्यायालय एवं एनजीटी को कर रहा गुमराह
बालाघाट नगर के ह्रदयतल में स्थित शासकीय देवी तालाब की बेशकीमती भूमि जिसका अनुमानित वर्तमान बाजार मूल्य लगभग 1 हजार करोड़ रूपए है उक्त भूमि को भू-माफियाओं के चुंगल से मुक्त कराने एवं राजस्व अभिलेखों की त्रुटी को सुधार कर अतिक्रमण मुक्त एवं संरक्षित किये जाने के सम्बन्ध में उच्च न्यायालय जबलपुर एवं एनजीटी भोपाल में दायर याचिका में मध्यप्रदेश शासन एवं कलेक्टर बालाघाट की ओर से सत्य, वास्तविक तथा पूर्ण जवाब प्रस्तुत नहीं किये जाने के सम्बन्ध में याचिकर्ताओं की ओर से मुख्य सचिव मध्यप्रदेश शासन को पत्र लिखकर मांग की गई उनके द्वारा उच्च न्यायालय जबलपुर एवं एनजीटी भोपाल में शपथ पत्र प्रस्तुत कर सत्य, वास्तविक एवं पूर्ण जवाब प्रस्तुत करने की मांग की गई है l
क्या है मामला
बालाघाट नगर के शासकीय देवी तालाब की भूमि जो पटवारी हल्का क्रमांक 13/2 में स्थित है जिसका खसरा न. 319, रकबा 16.14 एकड़ है जो राजस्व अभिलेखों में वर्ष 1985 के बाद से राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत के कारण निजी स्वामित्व में दर्ज है l जिसके सम्बन्ध में राजस्व अभिलेखों में पूर्व की त्रुटि को सुधार कर कुल शासकीय भूमि का कुल रकबा 16.14 एकड़ में से 16.11 एकड़ को शासकीय भूमि के रूप में दर्ज करने के लिए माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर में एक जनहित याचिका क्रमांक WP/22409/2024 प्रस्तुत की गई है l उक्त याचिका की सुनवाई कर माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर के मुख्य न्यायाधीश की बेंच ने दिनांक 21/08/2024 को आदेश जारी कर शासन से स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के लिए निर्देश किया था l जिसे मध्यप्रदेश शासन / कलेक्टर बालाघाट के प्रतिनिधि ने दाखिल नहीं किया, जिस पर पुनः न्यायालय के द्वारा दिनांक 27.11.2025 को आदेश जारी कर 4 सप्ताह में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश जारी किये गए, जिस पर मध्यप्रदेश शासन / कलेक्टर बालाघाट के प्रतिनिधि के रूप में अनुविभागीय अधिकारी (रा.) बालाघाट श्री गोपाल सोनी के द्वारा शपथ पत्र के साथ प्रथम आदेश के लगभग 16 महीनों के बाद दिनांक 09/01/2026 को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की गई है l
क्यों दायर की याचिका
उच्च न्यायालय जबलपुर में जनहित याचिका तत्कालीन तहसीलदार बालाघाट श्री रामबाबू देवांगन के द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय से शासकीय देवी तालाब के मालिकाना हक में प्राप्त शिकायत के सम्बन्ध में की गई जांच के प्रतिवेदन के आधार पर की गई थी l उक्त जांच प्रतिवेदन तत्कालीन तहसीलदार श्री रामबाबू देवांगन के द्वारा दिनांक 26.02.2020 को तत्कालीन कलेक्टर को भेजकर यह अनुसंशा की थी शासकीय देवी तालाब की भूमि जिसका खसरा न. 319 रकबा 16.14 एकड़ है, के वर्तमान राजस्व अभिलेखों में 123 बटांकन हो चुके है उसमे से 2 को छोड़कर शेष 121 बटांकन में शासन का नाम दर्ज करना उचित होगा l किन्तु तत्कालीन कलेक्टर कलेक्टरों के द्वारा राजस्व अभिलेखों में त्रुटी सुधार न करते हुए उक्त शासकीय भूमि पर शासन का नाम दर्ज नहीं किया गया जिसके कारण उच्च न्यायालय में जनहित याचिका प्रस्तुत करनी पड़ी l
भू-माफियाओं एवं राजस्व विभाग का षडयंत्र
बालाघाट नगर के पटवारी हल्का क्रमांक 13/2, खसरा न. 319, रकबा 16.14 एकड़ शासकीय देवी तालाब की भूमि को बालाघाट तहसील के तत्कालीन राजस्व अधिकारियों, पूर्व मालगुजार के वारसानों एवं ऋषभ डेवलपर्स बालाघाट के भागीदारों (भू-माफियाओं) द्वारा द्वारा साठ-गाठ कर राजस्व अभिलेखों में निजी हक में दर्ज कर मध्यप्रदेश शासन की लगभग 1000 करोड़ रूपए की बेशकीमती जमीन की अफरातफरी की है l उक्त शासकीय भूमि के लगभग 5.50 एकड़ भूमि पर शॉपिंग मॉल के साथ अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान बनाएं गए है एवं लगभग 1.50 एकड़ भूमि पर मिट्टी-मुरुम का भराव कर समतल भूमि बनाया गया है तथा शेष लगभग 9 एकड़ भूमि पानी से भरी हुई है l पिछले कई वर्षों से लगातार प्रदूषित एवं अतिक्रमण कर शासकीय देवी तालाब के अस्तित्व को मिटाने व उस पर भौतिक रूप से काबिज होने का षडयंत्र चल रहा है l जिसके कारण शासकीय देवी तालाब लगातार प्रदूषित एवं अतिक्रमित होकर अपने अस्तित्व को खोते जा रहा है l
देवी तालाब का न्यायालयीन इतिहास
एवं 2 (कुल 3 डिसमिल) डिसमिल भूमि की डिक्री पारित की थी उसके स्थान पर भू-माफियाओं से सांठगाठ कर सम्पूर्ण भूमि अर्थात 16.14 एकड़ भूमि उमराव बी के वारसानों के नाम पर दर्ज कर दी जिसके बाद उमराव बी के वारसानों द्वारा ऋषभ डेवलपर्स के भागीदारों (डॉ. ऋषभ कुमार जैन, पूरनकुमार अडवाणी एवं महेंद्र सुराना) को उक्त बेशकीमती शासकीय भूमि को विक्रय कर दिया गया l
उच्च न्यायालय में एसडीएम का जवाब
की हो गई और यह भी नहीं बताया गया है कि पूर्व में उच्च न्यायालय जबलपुर के द्वारा अतिक्रमणकारी के 1 एवं 2 (कुल 3 डिसमिल) डिसमिल का निर्माण शासकीय देवी तालाब की पार पर होने के कारण उसके पक्ष में मात्र 1 एवं 2 (कुल 3 डिसमिल) डिसमिल भूमि की डिक्री की थी न की सम्पूर्ण 16.14 एकड़ शासकीय भूमि की उसके पक्ष में डिक्री थी l इस प्रकार से अनुविभागीय अधिकारी (रा.) बालाघाट श्री गोपाल सोनी का उच्च न्यायालय में मध्यप्रदेश शासन / कलेक्टर बालाघाट की ओर से प्रस्तुत जवाब भ्रामक है जो उच्च न्यायालय को भ्रमित करने एवं भू-माफियाओं को लाभ पहुचाने की मंशा से प्रस्तुत किया गया है l वही एनजीटी भोपाल में भी अनुविभागीय अधिकारी (रा.) बालाघाट श्री गोपाल सोनी ने मध्यप्रदेश शासन / कलेक्टर बालाघाट की ओर से प्रस्तुत शासकीय देवी तालाब की भूमि को निजी स्वामित्व की भूमि बताया है l
मुख्य सचिव से मांग
उच्च न्यायालय जबलपुर एवं एनजीटी भोपाल में विचाराधीन याचिका के याचिकाकर्ताओं द्वारका नाथ चौधरी, प्रदीप परांजपे, राम मोटवानी, पी.एल. पुछिया एवं नगर के नागरिक बसंत पटेल ने दिनांक 19/01/2026 को मामले से सम्बंधित सम्पूर्ण भू-माफियाओं के चुंगल से छुड़ाने तथा शासकीय देवी तालाब का पुनर्स्थापन कर उसे संरक्षित करने का कष्ट करे l


