छपारा-सिवनी जिले के भीमगढ़ बांध में डुब से खुलने वाली जमीनों के लिए इस वर्ष में जल संसाधन विभाग के अधिकारी मदान होकर आदेश निकाल दिये के डुब से खुलने वाली जमीनों में कोई खेती न करें जो विस्थापित है उनको सरकार आर्थिक और सामाजिक पुनर्वास देने के लिए बाध है कांग्रेसी शासन में कांग्रेसी सरकार ने आर्थिक और सामाजिक पुनर्वास विस्थापितों को दिया नहीं यह नियम की अवहेलना है और भाजपा सरकार लगभग 20 साल से मध्य प्रदेश में है इस सरकार द्वारा समीक्षा ना करना यह जन अवहेलना और वर्तमान शासकीय आदेश किसको प्रताड़ना माना जा सकता है इस समय बाध में डुब से खुलने वाली जमीन ठेका पर दी जाती है और जन चर्चा के अनुसार वह राशि शासन को ना जाकर किसी की जेब में जाती है सरकारी राजस्व स्वामित्व की भूमि और वन भूमि जब डूब से खुलती है तो इस जमीन पर लोग खेती कर रहे हैं सरकारी रिकॉर्ड में यह जमीन दर्शित नहीं होती सीधा खेल इस जमीन का पैसा जेब में जाने का है ऐसी जन चर्चा है अगर शासन इनको रोक लगा दे तो हजारों क्यूसेक पानी सुरक्षित रह जाएगा नेहरो से जो रिसाव हो रहा है वह रिसाव को जल संसाधन बंद करने को तैयार नहीं तो पानी सुरक्षित रहे कैसे इसके अतिरिक्त कुछ ऐसे लोग अपात्र भी है जिनकी सेंटीमीटर के हिसाब से जमीन नहीं डूबी लेकिन पटृटा उनको प्राप्त है जल संसाधन विभाग के पास ग्राम बार एक-एक व्यक्ति की जानकारी है कौन पात्र हैं कौन अपात्र है और किस गांव के किस खसरा नंबर में कौन खेती कर रहा है अब अपात्र लोगों पर रोक लगाई जाए यदि पत्रों को भी छेड़ गया तो निश्चित रूप से विरोध मुखर होकर सड़क पर आने की संभावना है ।


