जबलपुर। गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर नेताजी सुभाषचंद्र बोस केन्द्रीय कारागार, जबलपुर से 9 आजीवन कारावास की सजा काट रहे बंदियों को रिहा किया जाएगा। यह वर्ष 2026 की पहली बड़ी रिहाई होगी, जिसमें इन बंदियों को उनके बेहतर आचरण और जेल में अनुशासित जीवन के चलते शासन के नियमों के तहत सजा में छूट दी गई है।
केन्द्रीय कारागार अधीक्षक अखिलेश तोमर ने जानकारी देते हुए बताया कि हर वर्ष की तरह इस बार भी 26 जनवरी के अवसर पर पात्र बंदियों को रिहा किया जा रहा है। चयन प्रक्रिया में बंदियों के आचरण, व्यवहार, सुधारात्मक गतिविधियों में भागीदारी और जेल प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर निर्णय लिया गया है।
इस सूची में जबलपुर जिले के 2, कटनी जिले के 4, डिंडौरी, सिवनी और मंडला जिले के एक-एक बंदी शामिल हैं। रिहा होने वालों में जबलपुर के इंद्रसिंह उर्फ बबलू राजपूत एवं विशाल सिंह, कटनी के शत्रुघन सिंह, महेन्द्र कुमार उर्फ रज्जन तिवारी, मिहिलाल केवट और सुखलाल बर्मन उर्फ मुनीम, डिंडौरी के उजियार सिंह, सिवनी के प्रताप लोधी तथा मंडला के रमेश यादव शामिल हैं।
कारागार प्रशासन के अनुसार इन सभी बंदियों ने लंबे समय तक जेल में रहते हुए अच्छा आचरण प्रदर्शित किया, किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता में लिप्त नहीं पाए गए और सुधार कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी निभाई। इसी आधार पर राज्य शासन से अनुमोदन मिलने के बाद इन्हें गणतंत्र दिवस पर रिहा करने का निर्णय लिया गया है।
गौरतलब है कि गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर शासन द्वारा ऐसे बंदियों को सजा में विशेष छूट दी जाती है, जिनका व्यवहार संतोषजनक होता है, ताकि वे समाज की मुख्यधारा में लौटकर नया जीवन प्रारंभ कर सकें। इन 9 बंदियों के लिए 26 जनवरी न सिर्फ एक राष्ट्रीय पर्व होगा, बल्कि उनके जीवन में ‘नई शुरुआत’ का दिन भी साबित होगा।


