July 29, 2026
सी टाइम्स
हेल्थ एंड साइंस

विनिर्माण संबंधी खामियों के कारण सन फार्मा और सिप्ला ने अमेरिका से वापस मंगाईं अपनी दवाएं



नई दिल्ली, 26 जनवरी भारतीय दवा कंपनियों सन फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्रीज और सिप्ला ने विनिर्माण से जुड़ी समस्याओं के कारण अमेरिका के बाजार से अपनी कुछ दवाएं वापस मंगाई हैं। यह जानकारी अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (यूएसएफडीए) की ताजा रिपोर्ट में सामने आई है।

एन्फोर्समेंट रिपोर्ट में अमेरिकी स्वास्थ्य नियामक ने बताया कि मुंबई मुख्यालय वाली सन फार्मा की अमेरिका स्थित यूनिट एक जेनरिक दवा की हजारों बोतलें वापस मंगा रही है। यह दवा डैंड्रफ (रूसी) और त्वचा की सूजन व खुजली जैसी समस्याओं के इलाज में इस्तेमाल होती है।

न्यू जर्सी के प्रिंसटन में स्थित सन फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्रीज इंक ने फ्लुओसिनोलोन एसीटोनाइड टॉपिकल सॉल्यूशन की 24,624 बोतलें वापस मंगाईं हैं। जांच में पाया गया कि यह दवा अशुद्धता और गुणवत्ता के तय मानकों पर खरी नहीं उतर रही थी।

कंपनी ने 30 दिसंबर 2025 को अमेरिका में देशभर में क्लास III रिकॉल शुरू किया। यूएसएफडीए के अनुसार, क्लास III रिकॉल उन मामलों में किया जाता है, जहां दवा के इस्तेमाल से स्वास्थ्य को नुकसान होने की संभावना बहुत कम होती है।

यूएसएफडीए ने यह भी बताया कि सन फार्मा ने क्लिंडामाइसिन फॉस्फेट यूएसपी नाम की दवा के कुछ बैच भी वापस मंगाए हैं। यह दवा मुंहासों के इलाज में इस्तेमाल होती है।

इस दवा को 26 नवंबर 2025 को वापस मंगाया गया था, क्योंकि जांच में अशुद्धता का स्तर और दवा की मात्रा तय सीमा से बाहर पाई गई थी। इसे भी क्लास III रिकॉल में रखा गया है।

वहीं दूसरी ओर, यूएसएफडीए ने बताया कि सिप्ला की अमेरिका स्थित यूनिट ने भी 15,000 से ज्यादा इंजेक्शन सिरिंज अमेरिकी बाजार से वापस मंगाई हैं।

सिप्ला यूएसए इंक का मुख्यालय न्यू जर्सी के वॉरेन में है। इसने लैनरियोटाइड इंजेक्शन की 15,221 पहले से भरी हुई सिरिंज वापस मंगाई हैं। इन सिरिंज में कण पाए गए हैं।

सिप्ला ने यह रिकॉल 2 जनवरी 2026 को क्लास II रिकॉल के तहत शुरू किया। यूएसएफडीए के अनुसार, क्लास II रिकॉल तब किया जाता है, जब दवा के इस्तेमाल से अस्थायी या ठीक हो सकने वाले स्वास्थ्य प्रभाव हो सकते हैं, हालांकि गंभीर नुकसान की संभावना कम रहती है।

अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा दवा बाजार है। इसलिए वहां काम करने वाली दवा कंपनियों के लिए नियमों का पालन और दवाओं की गुणवत्ता बनाए रखना बेहद जरूरी माना जाता है।

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