जबलपुर। सुभाष चंद्रा पर दर्ज एफआईआर को वापस कराने के लिए कथित तौर पर धमकाने और दबाव बनाने के मामले में अब उसके बेटे अमित चंद्रा पर भी पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर लिया है। मामला स्वास्थ्य विभाग और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से जुड़ा होने के कारण अब और भी संवेदनशील तथा गंभीर होता जा रहा है।
दरअसल, पूर्व जिला कार्यक्रम प्रबंधक विजय पाण्डेय के मार्कशीट के फर्जी सत्यापन दस्तावेज तैयार कर झूठी शिकायत मिशन संचालक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं कलेक्टर जबलपुर को करने के आरोप में सुभाष चंद्रा के खिलाफ थाना ओमती में 3 फरवरी को एफआईआर दर्ज की गई थी। इस एफआईआर के बाद सुभाष चंद्रा और उसके परिवार की मुश्किलें बढ़ गई थीं।
इसी प्रकरण में अब नया मोड़ तब आया जब सुभाष चंद्रा का पुत्र अमित चंद्रा, जो वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग के मझोली कार्यालय में बीपीएम (ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर) के पद पर पदस्थ है, अपने पिता पर दर्ज एफआईआर वापस कराने के लिए सीधे जिला कार्यक्रम प्रबंधक विजय पाण्डेय पर दबाव बनाने पहुंच गया।
जानकारी के अनुसार अमित चंद्रा पहले विजय पाण्डेय के विक्टोरिया स्थित कार्यालय पहुंचा, जहां उसने खुले तौर पर दबाव बनाया और एफआईआर वापस लेने की मांग की। जब वहां बात नहीं बनी तो वह विजय पाण्डेय के रामपुर स्थित निवास पर भी पहुंच गया और उनके परिवार के सदस्यों को भी मानसिक रूप से प्रताड़ित करते हुए दबाव बनाने लगा। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो और अन्य साक्ष्य विजय पाण्डेय द्वारा सुरक्षित रखे गए हैं।
इसके बाद विजय पाण्डेय ने पूरे मामले की लिखित शिकायत थाना ओमती एवं थाना गोरखपुर पुलिस को वीडियो साक्ष्यों के साथ दी। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल अमित चंद्रा के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कर ली और उसकी गिरफ्तारी के लिए उसके घर दबिश दी। हालांकि पुलिस के पहुंचने से पहले ही अमित चंद्रा फरार हो गया।
बताया जा रहा है कि अमित चंद्रा फिलहाल किसी का फोन नहीं उठा रहा है और लगातार अपना मोबाइल बंद रखे हुए है। पुलिस का कहना है कि आरोपी की तलाश सरगर्मी से की जा रही है और जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
इस पूरे मामले ने स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा दिया है। एक तरफ जहां फर्जी दस्तावेज बनाकर झूठी शिकायत करने का आरोप है, वहीं दूसरी तरफ अब उसी केस को दबाने के लिए सरकारी अधिकारी पर दबाव और धमकी देने का मामला सामने आया है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या एक जिम्मेदार पद पर पदस्थ अधिकारी इस तरह से कानून को अपने हाथ में लेकर दबाव बना सकता है।
फिलहाल पुलिस दोनों मामलों को गंभीरता से जांच में ले रही है। सुभाष चंद्रा के बाद अब उसका बेटा भी कानून के शिकंजे में आ चुका है, और आने वाले दिनों में इस प्रकरण में और बड़े खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।


