April 6, 2026
सी टाइम्स
अंतरराष्ट्रीय

पाकिस्तान और तुर्किये इस्लामी कट्टरता के नए चेहरे: रिपोर्ट



नई दिल्ली, 15 फरवरी पाकिस्तान अपने अस्तित्व के सात दशक बाद भी एक जिम्मेदार राष्ट्र के रूप में स्थापित होने में असफल रहा है, वहीं तुर्किये पर इस्लामी कट्टरता और उग्रवाद को बढ़ावा देने के आरोपों ने वैश्विक माहौल को चिंताजनक बना दिया है। एक प्रमुख पोर्टल में प्रकाशित विचारात्मक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।



रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने वाली घटनाओं को मौन समर्थन दिया और वर्ष 2024 के छात्र आंदोलन को परोक्ष रूप से समर्थन देकर देश को दो वर्षों तक अराजकता और हिंसा की ओर धकेला। 12 फरवरी 2026 को हुए आम चुनावों के बाद भले ही बांग्लादेश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया फिर से पटरी पर लौटती दिख रही हो, लेकिन बीते दो वर्षों में पाकिस्तान की ओर से पूर्वी पाकिस्तान रहे बांग्लादेश में भारत-विरोधी भावनाएं भड़काने के प्रयास स्पष्ट रूप से सामने आए हैं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा देने में पाकिस्तान की भूमिका कई बार उजागर हो चुकी है। बांग्लादेश में उथल-पुथल के बीच पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ एक नया मोर्चा खोलने की कोशिश की।

रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान को कतर, तुर्किये और सऊदी अरब जैसे कुछ खाड़ी देशों से आर्थिक और सैन्य समर्थन मिलता रहा है। साथ ही, चीन जैसे देश भी भारत को कमजोर करने के लिए पाकिस्तान का इस्तेमाल करते हैं। रिपोर्ट में पाकिस्तान को “जहरीली नोक वाला खंजर” बताया गया है, जिसका इस्तेमाल विभिन्न देश भारत के खिलाफ ‘ग्रे जोन वॉर’ के लिए करते हैं।

रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि पाकिस्तान अलगाववाद को बढ़ावा देता है, जबकि तुर्किये और कतर के साथ मिलकर भारत के 20 करोड़ से अधिक मुस्लिमों को प्रभावित करने की कोशिश की जाती है।

इस परिप्रेक्ष्य में रिपोर्ट ने भारत को विशेष रूप से तुर्किये के प्रति ‘पारस्परिकता की नीति’ अपनाने की सलाह दी है। इसमें कहा गया है कि तुर्किये भारतीय मुस्लिम छात्रों को छात्रवृत्ति देता है और उन पर कट्टर विचारधारा थोपने का प्रयास करता है। इसके जवाब में भारत को कुर्द छात्रों का स्वागत कर उन्हें अपनी पहचान, सांस्कृतिक और राजनीतिक अधिकारों के लिए आवश्यक कौशल विकसित करने का अवसर देना चाहिए, ताकि तुर्किये के बढ़ते अधिनायकवादी रुझानों का संतुलन किया जा सके।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना ने देश को मुसलमानों के लिए एक राष्ट्र के रूप में परिभाषित किया था, लेकिन समय के साथ पाकिस्तान नफरत, आक्रामकता और असहिष्णुता की राह पर भटक गया।

साथ ही तुर्किये को 21वीं सदी में कट्टरपंथ का एक प्रमुख इंजन बताते हुए रिपोर्ट में विश्व शक्तियों, विशेषकर भारत, से आह्वान किया गया है कि वे इस्लामी उग्रवाद और कट्टरता के प्रसार को रोकने के लिए आगे आएं, ताकि दुनिया को और अधिक धार्मिक विभाजन की ओर बढ़ने से रोका जा सके।

अन्य ख़बरें

स्नूकर टूर चैंपियनशिप के फाइनल में चीनी खिलाड़ी ने जीता खिताब

Newsdesk

पाकिस्तानी सेना ने तीन बलूच नागरिकों की हत्या की और 5 लोगों को जबरन किया गायब: मानवाधिकार संगठन

Newsdesk

आईआरजीसी के खुफिया प्रमुख मेजर जनरल खदेमी की मौत

Newsdesk

Leave a Reply

Discover more from सी टाइम्स

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading