शहर की स्वच्छता दीदी मोना ने यह साबित कर दिया कि उनके लिए अपने दायित्व से बढ़कर कुछ भी नहीं है। रात भर अपने विवाह समारोह की रस्मों और कार्यक्रमों में व्यस्त रहने के बावजूद उन्होंने अगले ही दिन सुबह बिना विश्राम किए सीधे अपनी बीट पर पहुंचकर झाड़ू संभाल ली। थकान के बावजूद उनके चेहरे पर जिम्मेदारी का भाव साफ झलक रहा था। वर्दी बदलने का भी समय नहीं मिला, फिर भी वे पूरे मनोयोग से सड़क की सफाई करती रहीं।
सुबह जब राम प्रकाश अहिरवार स्वच्छता व्यवस्था का निरीक्षण करने निकले, तो उन्होंने मोना को अन्य कपड़ों में काम करते देखा। रुककर पूछताछ करने पर जब उन्हें पता चला कि वे शादी समारोह से सीधे ड्यूटी पर आई हैं, तो वे भी भावुक हो उठे। उन्होंने मोना को आज की “असली नायिका” बताते हुए कहा कि ऐसे समर्पित और कर्मठ सफाई मित्रों की वजह से ही शहर स्वच्छता में नंबर-1 बनने का सपना साकार हो सकता है।
इस दौरान उपायुक्त संभव अयाची, स्वास्थ्य अधिकारी अंकिता बर्मन सहित अन्य अधिकारियों ने भी उनके जज्बे की सराहना की। मोना की यह प्रेरक कहानी यह संदेश देती है कि सच्ची जिम्मेदारी वही है, जो हर परिस्थिति में निभाई जाए।


