स्वास्थ्य अधिकारी और सेडमैप संस्थान की सांठगांठ, प्रक्रिया की पारदर्शिता पर उठे सवाल
अनूपपुर । मध्यप्रदेश के अनुपपुर जिले में स्वास्थ्य विभाग से बुद्ध आउटसोर्सिंग नियुक्ति साक्षात्कार को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। यह मामला उद्यमिता विकास केंद्र (सेडमैप) के माध्यम से आयोजित साक्षात्कारों से जुड़ा है, जिसमें चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता, निष्पक्षता और वैधानिकता पर प्रश्नचिह्न लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने संभागीय आयुक्त शहडोल को विस्तृत लिरिका आवेदन सौंपकर पूरं प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। शिकायतकर्ता गण राहुल आलोक राज सलमान मंसूरी जितेन्द्र प्रजापति, भूपेंद्र, शान चंद एवं अन्य 23 शिकायत कर्ताओं के आवेदन के अनुसार, सेडमैप के माध्यम से जिला अनूपपुर के लिए स्वास्थ्य विभाग अंतर्गत विभिन्न पदों कम्प्यूटर ऑपरेटर एवं एम.टी.एस. (ग्रुप-डी) पर आउटसोर्सिंग नियुक्ति हेतु ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए थे। यह प्रक्रिया दिसंबर 2025 में प्रारंभ हुई, जिसमें कुल 895 अभ्यर्थियों ने ऑनलाइन आवेदन किया।
शिकायत के अनुसार, सेडमैप द्वारा पत्र क्रमांक सेडमैप/मैनपावर/12025/8888/ भोपाल दिनांक 12 दिसंबर 2025 के माध्यम से ऑनलाइन प्राप्त अभ्यर्थियों के साक्षात्कार की तिथियाँ निर्धारित की गई। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार कम्प्यूटर ऑपरेटर 18 दिसंबर 2025 (समय सुबह
11 बजे एग.टी.एस. (ग्रुप-डी) 19 दिसंबर 2025 (समय सुबह 11 बजे एम.टी.एस. (ग्रुप-डी) 20 दिसंबर 2025 (समय सुबह 11 बजे) इन साक्षात्कारों का आयोजन भोपाल स्थित संडगँप कार्यालय, एमपी-16, अरंग हिल्या, पुरानी जेल बंड सामने, निर्वाचन सदन के पास किया जाना दर्शाया गया है। इसके पश्चात्त, कार्यालय मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी जिला अनूपपुर द्वारा चिकित्सा एवं (सीएमएचओ), फा क्रमांक 13 दिसंबर 2025 क माध्यम अधिकारियों को साक्षात्कार हेतु नामांकित करने का उल्लेख है। वहीं, एक अन्य पत्र क्रमांक /गु.चि./2025/432 17 दिसंबर 2025 के जरिए 18, 19 और 20 दिसंबर 2025 को भोपाल में साक्षात्कार आयोजित किए जाने की सूचना दी गई।
112 लोगों की एक सूची पहले से मौजूद थी, जिनमें से अधिकांश कथित रूप से साक्षात्कार लेने वाले अधिकारियों के परिचित
साक्षात्कार पैनल पर आरोप
शिकायत पत्र में उल्लेख है कि साक्षात्कार प्रक्रिया में प्रमुख रूप से डीएचओ-2 तथा फार्मासिस्ट स्टोर कीपर की भूमिका रही। आरोप है कि इन अधिकारियों द्वारा साक्षात्कार की सूची पहले से तैयार रखी गई थी और अधिकांश चयन पूर्वनिर्धारित था। शिकायत के अनुसार, साक्षात्कार के दिनों में लगभग
बताए गए हैं। आरोप है कि इन अभ्यर्थियों का चथन उनके निवास स्थान के अनुसार जैसी स्वास्थ्य इकाइयों में पहले ही तय कर
लिया गया था। उपस्थिति, डेटा और चयन पर सवाल
शिकायत में यह भी कहा गया है कि 112 नामों में से 21 अभ्यर्थी साक्षात्कार में उपस्थित ही नहीं हुए, इसके बावजूद उनके नाम चयन सूची में शामिल कर लिए गए। इसके अतिरिक्त, आरोप लगाया गया है कि इन 112 लोगों में से 50 अभ्यर्थियों का ऑनलाइन आवेदन इंदा रोडमैप की सूची में उपलब्ध ही नहीं है, पानी उनके नामों का कोई आधिकारिक डिजिटल
रिकॉर्ड नहीं पाया गया। यह रिथति पूरी चयन प्रक्रिया की वैधानिकता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। शिकाकाकर्ता के अनुसार, जिन अभ्यर्थियों ने वास्तव में ऑनलाइन आवेदन किया और साक्षात्कार में उपस्थित रहे, उन्हें दरकिनार कर दिया गया। दबाव का आरोप
शिकायत र अनुसार, जिन अभ्यर्थियों ने यह राशि देने से इनकार किया, उन्हें उनके गृह जिल से 75 से 150 किलोमीटर दूर पदस्थ किया गया, जिससे कम वेतन में कार्य करना उनके लिए व्यावहारिक रूप से असंभव हो गया। इतना ही नहीं, आरोप है कि वई चयनित अभ्यर्थियों से त्यागपत्र और स्थानांतरण पत्र सडमैप, सीएमएचओ एवं जुइस इंटरप्राइजेज को ई-मेल के माध्यम से पहले ही भिजवा लिए गए थे, जिससे यह संकेत मिलता है कि नियुक्ति प्रक्रिया साक्षात्कार से पहले ही
पूरी कर ली गई थी। वरिष्ठ अधिकारियों पर प्रभाव डालने का दावा
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि 17 दिसंबर 2025 से 24 दिसंबर 2025. तक संबंधित अधिकारी संडमैप भोपाल कार्यालय में उपस्थित रहे और संहगैप के नोडल अधिकारी एवं अन्य अधिकारियों पर यह कहकर दबाव बनाया गया कि सूची में शामिल लोग जिला कलेक्टर एवं सीएमएचओ अनुपपुर से जुड़े तथा मंत्री के लोग हैं। आरोप के अनुसार, इस दौरान
मोबाइल पर बातचीत कर विश्वास में लेकर सूची को अंतिम रूप दिया गया।
संभागीय आयुक्त से जांच और कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ताओं ने संभागीय आयुक्त शहडोल से आग्रह किया है कि वे स्वयं इस पूरे प्रकरण का संज्ञान लें और स्वास्थ्य विभाग के संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारी द्वारा किए गए कथित भ्रष्टाचार को रोकने हेतु सख्त कदम उठाएं। उन्होंने जनहित और अपने हित में शीघ्र, निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराए जाने की मांग की है। शिकायत के साथ कई दस्तावेजों की छायाप्रति संलग्न की गई है, जिनमें पत्राचार, तिथियाँ, सूचियाँ और अन्य साक्ष्य शामिल बताए गए हैं। साथ ही, अन्य कथित पीड़ित आवेदकों के हस्ताक्षर भी आवेदन के साथ प्रस्तुत किए गए हैं।
प्रशासन की भूमिका पर नजर
यह मामला सामने आने के बाद अब निगाहें प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर टिकी हैं कि वे इन आरोपों को किस गंभीरता से लेते हैं। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं. तो यह न केवल आउटसोर्सिंग व्यवस्था की खामियों को उजागर करेगा, बल्कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की आवश्यकता को भी रेखांकित करेगा। फिलहाल यह पूरा मामला शिकायत और दस्तावेजों पर आधारित है। जांच के बाद ही सच्चाई स्पष्ट हो सकेगी। प्रशासनिक कार्रवाई और आंच रिपोर्ट का इंतजार अब आगजन और अभ्यर्थी कर रहे हैं।


