कुरई/सिवनी – जल संरक्षण एवं भूजल संवर्धन को लेकर संचालित “जल गंगा संवर्धन अभियान” अब जनभागीदारी के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में नई पहचान बना रहा है। जनपद पंचायत कुरई अंतर्गत विभिन्न ग्राम पंचायतों में “मेरा वाटर बैंक” निर्माण कार्यों का शुभारंभ किया गया, जिससे ग्रामीणों में उत्साह का माहौल देखा गया। पंचायत प्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं ग्रामीणों ने इसे आने वाले समय में जल संकट से निपटने की दिशा में बड़ा कदम बताया।
ग्राम पंचायत आमगांव में सरपंच रामलाल उईके द्वारा निर्माण कार्य का शुभारंभ किया गया। इस दौरान अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी संजय डहेरिया, उपमंत्री अमित वरकड़े, सचिव लक्ष्मण पंचेश्वर, रोजगार सहायक मनोहर लाल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। वक्ताओं ने कहा कि जल संरक्षण वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है और “मेरा वाटर बैंक” योजना वर्षा जल संचयन, भूजल स्तर सुधारने तथा किसानों को भविष्य में पर्याप्त जल उपलब्ध कराने में सहायक सिद्ध होगी।
इसी क्रम में ग्राम पंचायत सिल्लोर में सरपंच संजय मरकाम के नेतृत्व में जल संरक्षण कार्यों की शुरुआत की गई। ग्रामीणों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि गांव स्तर पर जल संरचनाओं का निर्माण आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य निवेश है। वहीं ग्राम पंचायत सारसडोल में सरपंच सतीश सरयाम एवं सचिव प्रकाश झारिया की मौजूदगी में “मेरा वाटर बैंक” निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया। कार्यक्रम में ग्रामीणों ने जल संरक्षण को जन अभियान बनाने का संकल्प लिया।
ग्राम पंचायत खांखरा में सरपंच श्रीमती सरिता धुर्वे, उपसरपंच श्रीमती सीता वर्मा तथा सचिव रामगोपाल डहरवाल की उपस्थिति में निर्माण कार्य का शुभारंभ किया गया। उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने कहा कि यदि समय रहते जल संरक्षण को प्राथमिकता नहीं दी गई तो भविष्य में गंभीर जल संकट उत्पन्न हो सकता है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे जल बचाने के लिए जागरूकता फैलाएं और जल संरचनाओं के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाएं।
कार्यक्रमों के दौरान वक्ताओं ने कहा कि शासन द्वारा चलाया जा रहा “जल गंगा संवर्धन अभियान” केवल एक योजना नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास का मजबूत आधार बनता जा रहा है। गांव-गांव में “मेरा वाटर बैंक” जैसी संरचनाओं के निर्माण से वर्षा जल का संग्रहण बढ़ेगा, भूजल स्तर में सुधार होगा तथा किसानों को सिंचाई एवं दैनिक उपयोग के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सकेगा।
ग्रामीणों ने निर्माण कार्यों का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि इन योजनाओं से आने वाले वर्षों में जल संकट की समस्या काफी हद तक कम होगी और गांव आत्मनिर्भर जल प्रबंधन की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे।


