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50 मामलों के साथ गुरुग्राम बना ब्लैक फंगस का हॉटस्पॉट

गुरुग्राम, 18 मई (आईएएनएस)| गुरुग्राम में अब ब्लैक फंगस (म्यूकोर्मिकोसिस) के कई मामले सामने आ रहे हैं जो जिला स्वास्थ्य विभाग के लिए एक और चिंता का विषय बनता जा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, गुरुग्राम में अब तक काले फंगस के करीब 50 मामले सामने आ चुके हैं और करीब 50 और लोगों के इस बीमारी से पीड़ित होने की आशंका है।

स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि कोविड से ठीक हुए लोगों में ब्लैक फंगस का संक्रमण पाया जा रहा है। अधिकारियों ने यह भी दावा किया कि पिछले साल कोरोना की पहली लहर में भी ब्लैक फंगस के कुछ मामले सामने आए थे। हालांकि, दूसरी लहर में ब्लैक फंगस के मामलों की संख्या अधिक है।

इस बीच स्वास्थ्य विभाग द्वारा पिछले चार पांच दिनों में ब्लैक फंगस के मामलों में तेज वृद्धि देखी गई है।

अधिकारियों के अनुसार, संक्रमण के इलाज में इस्तेमाल होने वाली एंटी फंगल दवा एम्फोटेरिसिन बी की अनुपलब्धता से निपटने के लिए राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने राज्य भर के अस्पतालों को दवा उपलब्ध कराने के लिए एक समिति का भी गठन किया है।

डॉ वीरेंद्र यादव, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, गुरुग्राम ने कहा कि जिले में हमारे पास 50 मामले हैं और हमने शहर के सभी अस्पतालों को रोजाना नंबर अपडेट करने का निर्देश दिया है और स्वास्थ्य विभाग को प्राथमिकता के आधार पर सूचित किया है। स्वास्थ्य विभाग ने एक समिति का गठन किया है और अस्पताल एम्फोटेरिसिन बी इंजेक्शन मांगने वाले पैनल पर सीधे आवेदन कर सकते हैं।

गुरुग्राम में पारस अस्पताल, के ईएनटी विभाग के प्रमुख डॉ अमिताभ मलिक ने आईएएनएस को बताया, ” यह संक्रमण ज्यादातर मधुमेह से पीड़ित रोगियों और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों को हो रहा है। जब एक मधुमेह रोगी को कोविड होता है, तो उसे एक स्टेरॉयड दिया जाता है जो प्रतिरक्षा को भी कमजोर करता है और शर्करा के स्तर को बढ़ाता है। सामान्य कोरोना मरीजों को यह संक्रमण नहीं होता है। ”

उन्होंने कहा कि यह मधुमेह, कैंसर या अंग प्रत्यारोपण वाले लोगों को प्रभावित करता है। बीमारी से जुड़े सामान्य लक्षण सिरदर्द, चेहरे का दर्द, नाक में दर्द, ²ष्टि की हानि या आंखों में दर्द, गाल और आंखों की सूजन है।

मलिक ने बताया कि सोमवार से उन्होंने 30 वर्ष के दो ऐसे युवा रोगियों का ऑपरेशन किया है जो पहले मधुमेह के रोगी नहीं थे, लेकिन उन्हें म्यूकोर्मिकोसिस हो गया था। इसका कारण यह है कि उनके रक्त शर्करा के स्तर की निगरानी नहीं की गई, जबकि उन्हें स्टेरॉयड दिए गए थे।

डॉक्टर सलाह देते हैं कि कोविड के इलाज के बाद मधुमेह की स्थिति में हाइपरग्लेसेमिया को नियंत्रित करें और ब्लड शुगर के स्तर पर लगातार नजर रखें और इसे बढ़ने न दें। इसके अलावा डॉक्टर सलाह देते हैं कि कोविड के मरीज काफी समझदारी से स्टेरॉयड का इस्तेमाल करें। बिना डॉक्टर की सलाह के इसे बिल्कुल भी न लें। मधुमेह के रोगियों को भी अपनी शुगर की दवाएं लेनी चाहिए।

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