April 3, 2026
सी टाइम्स
राष्ट्रीय

क्या है कॉन्सुलर एक्सेस? भारत ने कहा-पाकिस्तान सजा पूरी कर चुके भारतीयों को छोड़े

नई दिल्ली, 1 जनवरी भारत ने गुरुवार को पाकिस्तान की कस्टडी से सिविल कैदियों, मछुआरों और उनकी नावों और लापता भारतीय रक्षा कर्मियों को जल्द रिहा करने और वापस भेजने की मांग की है। विदेश मंत्रालय की ओर से प्रेस रिलीज जारी कर इसकी जानकारी दी गई। इसके साथ ही भारत ने उन सभी कैदियों को कॉन्सुलर एक्सेस देने के लिए कहा है, जिन्हें अब तक यह नहीं मिला है।
इस सिलसिले में विदेश मंत्रालय ने कहा है, “पाकिस्तान से कहा गया है कि वह अपनी कस्टडी में बंद 35 भारतीय सिविल कैदियों और मछुआरों को तुरंत कॉन्सुलर एक्सेस दे।”

कॉन्सुलर एक्सेस के तहत जब कोई नागरिक विदेश में हिरासत में लिया गया हो, तो उसके देश के राजनयिकों से उसे मिलने, उसका हालचाल जानने, परिवार से संपर्क कराने या अन्य सहायता प्रदान करने की अनुमति मिलती है।

यह अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत कैदी का मौलिक अधिकार होता है। इसमें कैदियों को उसके देश के अधिकारियों से मिलने का अधिकार होता है। कॉन्सुलर एक्सेस पर द्विपक्षीय समझौते 2008 के नियमों के तहत ऐसी लिस्ट हर साल 1 जनवरी और 1 जुलाई को एक्सचेंज की जाती हैं।

विदेश मंत्रालय ने प्रेस रिलीज में लिखा, “भारत और पाकिस्तान ने आज नई दिल्ली और इस्लामाबाद में एक साथ राजनयिक चैनलों के जरिए भारत और पाकिस्तान के बीच न्यूक्लियर इंस्टॉलेशन और फैसिलिटी पर हमले पर रोक के समझौते के तहत आने वाले न्यूक्लियर इंस्टॉलेशन और फैसिलिटी की लिस्ट एक्सचेंज की है।”

बता दें, भारत और पाकिस्तान के बीच यह समझौता 31 दिसंबर 1988 को हुआ था, जिसे 27 जनवरी 1991 को लागू किया गया। समझौते में यह भी प्रावधान है कि भारत और पाकिस्तान हर कैलेंडर साल की पहली जनवरी को समझौते के तहत आने वाले न्यूक्लियर इंस्टॉलेशन और फैसिलिटी के बारे में एक-दूसरे को बताएंगे।

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