जबलपुर। VIP के एक कार्यक्रम ने सोमवार को जबलपुर की यातायात व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी। VIP मूवमेंट के नाम पर पूरे शहर को जाम में झोंक दिया गया। प्रमुख चौराहों से लेकर मुख्य सड़कों तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और आम नागरिक घंटों तक सड़क पर फंसे रहे।
सबसे बदतर हालात आंबेडकर चौराहा पर देखने को मिले, जहां कई घंटों तक ट्रैफिक पूरी तरह ठप रहा। हैरानी की बात यह रही कि जाम के दौरान ट्रैफिक पुलिस नदारद दिखाई दी। न कोई डायवर्जन, न कोई वैकल्पिक व्यवस्था—सिर्फ अव्यवस्था और अफरा-तफरी।
स्थिति तब और चिंताजनक हो गई जब स्कूल से लौट रहे मासूम बच्चे भी इस भीषण जाम में फंस गए। स्कूली वाहन, ऑटो, बाइक और कारें एक ही जगह जमी रहीं। गर्मी और भीड़ में बच्चों व बुजुर्गों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी।
घंटों बाद पुलिस मौके पर पहुंची और यातायात को किसी तरह धीरे-धीरे बहाल किया गया, लेकिन तब तक जनता का सब्र जवाब दे चुका था। लोगों ने सवाल उठाए कि जब कार्यक्रम की जानकारी पहले से थी, तो ट्रैफिक प्लानिंग क्यों नहीं की गई?
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर साबित कर दिया कि शहर की यातायात व्यवस्था VIP कल्चर के आगे पूरी तरह बौनी साबित हो रही है। नागरिकों का कहना है कि हर बार नेताओं के कार्यक्रमों में आम जनता को ही कीमत चुकानी पड़ती है—समय, परेशानी और मानसिक तनाव के रूप में।
अब सवाल यह है कि
क्या जबलपुर की सड़कों पर सिर्फ VIP ही चलेंगे?
क्या आम नागरिकों की कोई कीमत नहीं?


