मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में 4 अप्रैल की शाम चार मंजिला इमारत ढहने के बाद अब तक कम से कम तीन लोगों को जीवित बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया है। अधिकारियों ने रविवार को बताया कि मलबे में अन्य लोगों के दबे होने की आशंका को देखते हुए राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है। इस अभियान में एनडीआरएफ, स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन समेत कई एजेंसियां जुटी हुई हैं। वहीं, घटना की जांच भी शुरू कर दी गई है।
शनिवार को मलबे से दो शव बरामद किए गए थे। पुलिस के अनुसार मृतकों की पहचान 55 वर्षीय हनुमान यादव और 50 वर्षीय रामकृपाल यादव के रूप में हुई है।
घटना में जीवित निकाले गए तीन घायलों को शहडोल जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
छत्तीसगढ़ के भिलाई से राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की एक टीम शनिवार आधी रात को मौके पर पहुंची और बचाव अभियान में शामिल हो गई। अधिकारियों ने बताया कि वाराणसी से एनडीआरएफ की एक और टीम भी घटनास्थल के लिए रवाना हुई है।
अनूपपुर कलेक्टर हर्षल पंचोली ने रविवार को बताया, “अब तक पांच लोगों को बाहर निकाला गया है, जिनमें दो की मौत हो चुकी है और तीन का उपचार जारी है। एनडीआरएफ-एसडीआरएफ की टीम और जिला प्रशासन मौके पर राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि अभी भी चार से पांच लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है और उनकी तलाश की जा रही है। मौके पर डॉग स्क्वॉड भी पहुंच गया है।
आधिकारिक सूत्रों ने पुष्टि की है कि अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) के.सी. गुप्ता के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम भी मौके पर पहुंच चुकी है और घटना की जांच शुरू कर दी गई है।
अनूपपुर जिले के प्रभारी मंत्री दिलीप अहीरवार, जो घटना के समय छतरपुर जिले में थे, रविवार सुबह जल्दी घटनास्थल पर पहुंच गए।
शनिवार शाम करीब 5:30 बजे अनूपपुर जिले के कोतमा बस स्टैंड के पास स्थित एक चार मंजिला होटल अचानक भरभराकर गिर गया।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शनिवार को अपने सोशल मीडिया मंच एक्स पर शोक व्यक्त करते हुए संवेदना प्रकट की।
अधिकारियों के अनुसार, जो भवन ढहा वह कोतमा निवासी लल्लू अग्रवाल का बताया जा रहा है।
अनूपपुर नगरपालिका के उपाध्यक्ष बद्री प्रसाद ताम्रकार ने बताया कि ढही हुई इमारत के ठीक बगल में लगभग 20 बाय 50 फीट के भूखंड पर निर्माण कार्य के लिए करीब 12 फीट गहरा गड्ढा खोदा गया था। बाद में यह गड्ढा पानी से भर गया, जिससे लॉज की नींव कमजोर हो गई।
इसके अलावा, हादसे से पहले कई दिनों से इमारत के ऊपरी हिस्से में मरम्मत और निर्माण कार्य भी चल रहा था। घटना के समय टाइल्स और प्लंबिंग से जुड़ा काम जारी था।


