जबलपुर। पश्चिम मध्य रेलवे (पमरे) मुख्यालय जबलपुर में इन दिनों शीर्ष स्तर पर जबरदस्त हलचल देखी जा रही है। फरवरी माह में वर्तमान महाप्रबंधक (जीएम) के सेवानिवृत्त होने की तय तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे नए जीएम की नियुक्ति को लेकर अंदरखाने मंथन और रणनीति तेज हो गई है। रेलवे के प्रशासनिक गलियारों में इसे लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।
सूत्रों के मुताबिक, पमरे जैसे महत्वपूर्ण जोन की कमान संभालने के लिए देशभर के विभिन्न रेलवे जोनों में पदस्थ कई वरिष्ठ अधिकारी पूरी ताकत झोंक चुके हैं। दिल्ली स्थित रेलवे बोर्ड तक पहुंच बनाने और मजबूत पैरवी के लिए लगातार संपर्क साधे जा रहे हैं। यही कारण है कि इन दिनों बोर्ड स्तर पर फाइलों की आवाजाही भी असामान्य रूप से बढ़ गई है।
पर्दे के पीछे तेज लॉबिंग
रेलवे सूत्रों की मानें तो जीएम पद को लेकर कुछ अनुभवी और प्रभावशाली अधिकारियों के नाम चर्चा में हैं, जो लंबे समय से इस दौड़ में शामिल बताए जा रहे हैं। इनमें से कुछ अधिकारी पहले भी बड़े जोनों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं, जबकि कुछ को तकनीकी और प्रशासनिक क्षमता के आधार पर संभावित दावेदार माना जा रहा है।
बताया जा रहा है कि हर दावेदार अपने-अपने स्तर पर समर्थन जुटाने में लगा है, ताकि अंतिम सूची में उसका नाम प्रमुखता से शामिल हो सके। अंदरखाने यह लड़ाई केवल पद की नहीं, बल्कि भविष्य की रणनीतिक भूमिका और प्रभावशाली जोन की कमान पाने की मानी जा रही है।
नए जीएम के सामने होंगी बड़ी जिम्मेदारियां
पश्चिम मध्य रेलवे का आने वाला कार्यकाल विकास के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। स्टेशन पुनर्विकास परियोजनाएं, नई रेल सेवाओं की शुरुआत, माल परिवहन में वृद्धि, यात्री सुविधाओं का आधुनिकीकरण और वर्षों से लंबित परियोजनाओं को गति देना—ये सभी मुद्दे नए जीएम के सामने बड़ी चुनौती के रूप में होंगे।
यही वजह है कि रेलवे बोर्ड इस नियुक्ति को केवल औपचारिक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक रणनीतिक फैसला मान रहा है। सूत्रों का कहना है कि बोर्ड ऐसे अधिकारी की तलाश में है, जो न केवल अनुभवी हो, बल्कि तेज निर्णय लेने और बड़े प्रोजेक्ट्स को जमीन पर उतारने की क्षमता भी रखता हो।
फरवरी में हो सकता है बड़ा फैसला
माना जा रहा है कि फरवरी के पहले या दूसरे सप्ताह तक नए जीएम के नाम पर अंतिम मुहर लग सकती है। इसके बाद पश्चिम मध्य रेलवे को नई दिशा और नई कार्यशैली मिलने की उम्मीद की जा रही है। फिलहाल पमरे मुख्यालय से लेकर दिल्ली रेलवे बोर्ड तक हर स्तर पर इस कुर्सी को लेकर सरगर्मी चरम पर है।


