April 12, 2026
सी टाइम्स
प्रादेशिक

सड़कों पर भटकता रहा चीतल : सूचना के बाद भी नहीं पहुंची रेस्क्यू टीम
पार्षद ने कलेक्टर से लगाई गुहार


जबलपुर। शहर की बढ़ती आबादी और तेजी से सिमटते जंगल अब वन्यजीवों को भी रिहायशी इलाकों में आने के लिए मजबूर कर रहे हैं। ताजा मामला जबलपुर के महाराणा प्रताप वार्ड अंतर्गत धनवंतरी नगर क्षेत्र का है, जहां बीते तीन दिनों से एक चीतल जंगल से भटककर कॉलोनी और सड़कों पर घूमता नजर आ रहा है। चीतल के लगातार दिखाई देने से जहां क्षेत्रवासी दहशत में हैं, वहीं उसकी सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता खड़ी हो गई है।
स्थानीय लोगों के अनुसार चीतल पहले परसवाड़ा से लगे जंगल क्षेत्र में दिखाई देता था, लेकिन अब वह पूरी तरह रिहायशी इलाके में आ गया है। कभी वह गलियों में घूमता दिख रहा है, तो कभी मुख्य सड़क पार करता हुआ नजर आ जाता है। इससे न केवल नागरिकों में डर का माहौल है, बल्कि हर पल उसके सड़क दुर्घटना का शिकार होने का खतरा भी बना हुआ है।
क्षेत्रीय पार्षद जीतू कटारे ने बताया कि जैसे ही चीतल की मौजूदगी की जानकारी मिली, तत्काल पुलिस और वन विभाग दोनों को सूचना दी गई। इसके बावजूद तीन दिन बीत जाने के बाद भी कोई रेस्क्यू टीम मौके पर नहीं पहुंची। उन्होंने कहा कि स्थिति गंभीर है और यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है। मजबूरी में पूरे मामले से जिला कलेक्टर को भी अवगत कराया गया है।
पार्षद और रहवासियों का कहना है कि क्षेत्र में बड़ी संख्या में आवारा कुत्ते भी घूमते रहते हैं, जो चीतल के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं। कई बार कुत्तों के झुंड को चीतल का पीछा करते हुए भी देखा गया है, जिससे उसके घायल होने या मारे जाने की आशंका और बढ़ गई है। इसके अलावा तेज रफ्तार वाहनों से भी उसे लगातार खतरा बना हुआ है।
फिलहाल स्थानीय नागरिक खुद ही निगरानी रखकर चीतल की सुरक्षा करने की कोशिश कर रहे हैं। लोग उसे डराकर भगाने के बजाय शांति से दूर रखने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि वह किसी को नुकसान न पहुंचाए और खुद भी सुरक्षित रहे। साथ ही लगातार वन विभाग से मांग की जा रही है कि जल्द से जल्द रेस्क्यू कर चीतल को सुरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ा जाए।
यह मामला एक बार फिर इस बात की ओर इशारा करता है कि शहरी विस्तार और जंगलों के कटाव का सीधा असर अब वन्यजीवों पर पड़ने लगा है। यदि समय रहते ऐसी घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले समय में इंसान और वन्यजीवों के बीच टकराव की घटनाएं और बढ़ सकती हैं।

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