जबलपुर। प्रदेश में अगले वर्ष नगर निगम और नगरीय निकायों के चुनाव होने जा रहे हैं, जिसको लेकर भाजपा संगठन स्तर पर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। इसी क्रम में अब एल्डरमैन की नियुक्तियों को लेकर भी असमंजस की स्थिति बनती नजर आ रही है और संभावना जताई जा रही है कि इन नियुक्तियों पर फिलहाल ब्रेक लग सकता है।
प्रदेश संगठन के स्तर पर जब एल्डरमैन की नियुक्तियों को लेकर चर्चा हुई तो इसके राजनीतिक फायदे और नुकसान का भी आकलन किया गया। संगठन का मानना है कि एल्डरमैन की नियुक्तियों से पार्टी को लाभ से अधिक नुकसान हो सकता है, क्योंकि इससे बड़ी संख्या में ऐसे कार्यकर्ता नाराज हो सकते हैं जिन्हें मौका नहीं मिलेगा।
गौरतलब है कि प्रदेश में नगर निगम और नगर पालिकाओं के चुनाव जुलाई 2022 में हुए थे और अब अगले वर्ष मई से फिर चुनावी प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। ऐसे में यदि अभी एल्डरमैन की नियुक्ति होती है तो उन्हें महज एक वर्ष का ही कार्यकाल मिलेगा, जिससे संगठनात्मक और राजनीतिक दृष्टि से अपेक्षित प्रभाव नहीं पड़ पाएगा।
इसी कारण कई भाजपा कार्यकर्ता स्वयं भी एल्डरमैन बनने से पीछे हट रहे हैं। उनका कहना है कि एक वर्ष के सीमित कार्यकाल में वे न तो जनहित के बड़े काम कर पाएंगे और न ही अगले चुनाव में कोई खास राजनीतिक लाभ हासिल कर सकेंगे।
प्रदेश में 19 नगर निगम और 413 नगरीय निकायों में लगभग 500 एल्डरमैन नियुक्त किए जा सकते हैं। पार्षदों की संख्या के अनुपात में करीब 10 प्रतिशत एल्डरमैन नियुक्त होने का प्रावधान है। नगर निगम जबलपुर में भी आठ एल्डरमैन की नियुक्ति संभावित है, लेकिन यहां भी चुनाव लड़ने के इच्छुक कार्यकर्ता इसमें खास रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल एल्डरमैन की नियुक्ति के पक्षधर बताए जा रहे हैं और उन्होंने पदभार संभालते ही विधायकों और सांसदों से नाम भी मांगे थे। हालांकि संगठन में बन रही राय को देखते हुए अब यह देखना दिलचस्प होगा कि वास्तव में एल्डरमैन की नियुक्तियां होती हैं या नहीं।


