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April 3, 2026
सी टाइम्स
राष्ट्रीय

मेरे जन्म होने से पहले बनी योजना का मैंने प्रधानमंत्री बनने के बाद उद्घाटन कियाः पीएम मोदी



नई दिल्ली, 5 फरवरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को राज्यसभा में कहा कि कांग्रेस के शासन की कार्यशैली लटकाना, अटकाना, भटकाना वाली रही है। ये लोग सिर्फ जीप और खच्चर वाला मॉडल ही जानते हैं।

पीएम मोदी ने कहा, “मैं एक बात बताना चाहता हूं- जब मेरा जन्म नहीं हुआ था, उसके पहले सरदार वल्लभभाई पटेल ने नर्मदा नदी पर बांध बांधने की कल्पना की थी। विषय तो पक्का हो गया, सरदार साहब नहीं रहे। नेहरू ने शिलान्यास किया, लेकिन उसका उद्घाटन मैंने किया जब मैं प्रधानमंत्री बना। ये इनका (कांग्रेस) हाल है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में जो योजना नौ सौ करोड़ में होनी थी, उस योजना को 90 हजार करोड़ तक पहुंचा दिया गया। उन्होंने राष्ट्रपति के अभिभाषण प्रस्ताव पर बोलते हुए राज्यसभा में कहा कि देश के कई जिले ऐसे थे जिनको पिछड़ा मानकर छोड़ दिया गया और वहां करोड़ों लोगों की जो मौलिक जरूरत थी, उसे भी नकार दिया गया था। उन लोगों को ऐसे ही जीने के लिए मजबूर कर दिया गया था। ऐसे में जो पिछड़े इलाके थे, वो और पिछड़े होते गए और बर्बादी बढ़ती चली गई। हालत यह थी कि जब किसी को पनिशमेंट पोस्टिंग देनी होती थी, तो उनको ऐसे जिले में भेजा जाता था ताकि वो और खराब हो।

पीएम मोदी ने कहा कि हमने इस स्थिति को बदला। इस मामले में निर्णय लिया, यहां इन जिलों में युवा होनहार अधिकारियों को नियुक्ति दी गई और उन्हें कार्य करने के लिए पूरा 3 साल का समय दिया गया। प्रधानमंत्री ने कहा आज छत्तीसगढ़ के बस्तर को देखिए, छत्तीसगढ़ का बस्तर पूरे देश में बस्तर ऑलंपिक के नाम से चर्चा में है। आज विकास बस्तर के गांव-गांव में पहुंच रहा है। बस्तर के कई गावों ने पहली बार बस देखी है और उत्सव मनाया गया।

उन्होंने कहा कि यह एक बहुत बड़ा उदाहरण है। प्रधानमंत्री ने बताया कि उनका जन्म भी नहीं हुआ था उससे पहले सरदार वल्लभभाई पटेल ने नर्मदा नदी पर बांध बनाने की योजना बनाई। सरदार पटेल नहीं रहे, पंडित नेहरू ने परियोजना का शिलान्यास किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका इम्प्लीमेंटेशन देखिए, मेरा जन्म भी नहीं हुआ था तब यह योजना बनी थी, और मैंने प्रधानमंत्री के रूप में इसका उद्घाटन किया। उन्होंने बताया कि जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उन्हें तीन दिन तक नर्मदा सरदार सरोवर बांध के लिए अनशन पर बैठना पड़ा था।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने अपने आप को दांव पर लगा दिया था तब जाकर केंद्र सरकार ने इसको मंजूरी दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के जमाने में कई ऐसे काम थे जो राजनीतिक लाभ के लिए घोषित किए गए और कभी पूरे नहीं हुए, केवल फाइलों में अटके रहे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में हिमाचल के लिए ट्रेन की घोषणा संसद में की गई थी, लेकिन उनके कार्यकाल में आने तक भी इस ट्रेन लाइन का डिजाइन कागज तक में भी नहीं बना था।

उन्होंने जम्मू-कश्मीर की एक महत्वपूर्ण रेलवे लाइन का भी उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि जम्मू-उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेलवे लाइन का प्रोजेक्ट पूरा हुआ है। यहां देखा जा सकता है कि चारों ओर बर्फ की चादर छायी हुई है और उसके बीच में से एक वंदे भारत ट्रेन निकल कर जा रही है। प्रधानमंत्री ने सदन को बताया कि लगभग तीन दशक यानी 30 वर्षों तक यही प्रोजेक्ट लटका हुआ था। उन्होंने कहा कि इतने समय में दो पीढ़ी आगे बढ़ जाती है। अब हमारी सरकार ने इसे पूरा किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस को योजनाओं को लागू करने का कोई मंशा ही नहीं होती है। असम के बोगीबील का उदाहरण भी प्रधानमंत्री ने सदन में दिया है। उन्होंने बताया कि कितने ही वर्षों तक यह प्रोजेक्ट लटका रहा। हमने प्रगति के माध्यम से इस ब्रिज पर काम किया। यह ब्रिज तो असम और अरुणाचल को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण ब्रिज है। उन्होंने बताया कि प्रगति के माध्यम से इस ब्रिज के काम को रिव्यू किया और असम सहित पूरे नॉर्थ ईस्ट को बड़ी सुविधा देने वाला यह काम हमने पूरा किया।

उन्होंने कहा कि ये हैं जो बदलाव आ रहे हैं। कांग्रेस के हमारे साथियों को उसमें इम्प्लीमेंटेशन नजर नहीं आ रहा। प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस का पुराना प्लानिंग कमीशन वाला ही मॉडल है। वे लोग जीप और खच्चर वाला मॉडल ही पहचानते हैं। इससे आगे ये लोग कुछ नहीं जानते।

वहीं, प्रधानमंत्री ने टीएमसी के लिए कहा कि हमारे टीएमसी के साथियों ने काफी कुछ कहा, जरा खुद तो अपनी गिरेबान में देखें। निर्मम सरकार पतन के जितने भी पैरामीटर्स हैं, उसमें नए-नए रिकॉर्ड बनाती जा रही है, और उनके नेता यहां उपदेश दे रहे हैं। ऐसी निर्मम सरकार के कारण वहां (पश्चिम बंगाल) के लोगों का भविष्य अंधकार में डूब रहा है, लेकिन उनको कोई मतलब नहीं है। दुनिया का समृद्ध से समृद्ध देश भी अपने यहां से गैर कानूनी नागरिकों को बाहर निकाल रहा है, पर हमारे देश में घुसपैठियों को बचाने के लिए अदालतों पर प्रेशर डाला जा रहा है। देश का नौजवान कैसे ऐसे लोगों को माफ करेगा, जो उनका हक छीन रहे हैं?

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