सरकार को चूना लगाने में नहीं किया संकोच
अधिकारियों से निकटता और रसूख के सहारे हुआ फर्जीवाड़ा
जबलपुर। राइट टाउन क्षेत्र में नगर निगम की लीज पर आवंटित शासकीय जमीन के दुरुपयोग का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। जॉय स्कूल का संचालक अखिलेश मेबन और तत्कालीन तहसीलदार हरि सिंह धुर्वे के खिलाफ एक बार फिर गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने दोनों पर धोखाधड़ी, कूटरचना, षड्यंत्र और शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए हैं। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि शिक्षा के उद्देश्य से रियायती दरों पर ली गई जमीन का उपयोग नियमों के विपरीत अस्पताल और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया गया।
सूत्रों के मुताबिक, शिक्षा संस्थानों को मिलने वाली शासकीय जमीन का उपयोग केवल शैक्षणिक गतिविधियों तक सीमित होना चाहिए, लेकिन आरोप है कि अखिलेश मेबन ने “शिक्षा मंदिर” के नाम पर जमीन लेकर बाद में वहां अस्पताल की भव्य इमारत खड़ी कर दी। इससे न सिर्फ सरकार की नीति का उल्लंघन हुआ, बल्कि नगर निगम को भी भारी राजस्व नुकसान उठाना पड़ा। मामले में यह भी आशंका जताई जा रही है कि भूमि उपयोग परिवर्तन से जुड़े दस्तावेजों में जानबूझकर हेरफेर किया गया।
जांच एजेंसियों का कहना है कि इस पूरे प्रकरण में तत्कालीन तहसीलदार हरि सिंह धुर्वे की भूमिका बेहद संदिग्ध है। आरोप है कि उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए दस्तावेजों का सत्यापन सही ढंग से नहीं किया और नियमों को नजरअंदाज कर जमीन से संबंधित फाइलें आगे बढ़ा दीं। इसी आधार पर दोनों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और भ्रष्टाचार की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
अखिलेश मेबन का नाम पहले भी कई विवादों में सामने आ चुका है। उन पर स्कूल में मनमानी फीस वसूली, अभिभावकों से दुर्व्यवहार और नियमों की अनदेखी कर संस्थान चलाने के आरोप लगते रहे हैं। स्थानीय लोगों और अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल परिसर में निजी बाउंसर रखे गए हैं, जो सुरक्षा के नाम पर अक्सर अभद्रता और मारपीट तक कर देते हैं। इसके अलावा स्कूल स्टाफ के शोषण और मानसिक दबाव की चर्चाएं भी समय-समय पर सामने आती रही हैं।
वर्ष 2025 में सनातन धर्म को लेकर दिए गए आपत्तिजनक बयान के बाद भी मेबन खासे विवादों में रहे थे। उस मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद वे फरार हो गए थे, लेकिन विदेश भागने की कोशिश के दौरान कोच्चि एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लिए गए और बाद में जेल भेजे गए।
वहीं, हरि सिंह धुर्वे भी पहले फर्जी नामांतरण के एक अन्य मामले में जेल जा चुके हैं। उन पर सरकारी जमीन को निजी बताकर दूसरे के नाम दर्ज कराने का आरोप था, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे।
अब जॉय स्कूल जमीन प्रकरण ने एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही, शिक्षा माफिया और भू-माफिया की मिलीभगत को उजागर कर दिया है। पुलिस और ईओडब्ल्यू मामले की गहन जांच कर रही है और संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में और भी अधिकारियों की भूमिका सामने आ सकती है। इस प्रकरण को लेकर शहर में चर्चा है कि यदि जांच निष्पक्ष रही तो यह मामला कई बड़े खुलासों की ओर इशारा कर सकता है।
यहां यह बात खास है कि अखिलेश मेबन हमेशा अपने उच्च स्तरीय संबंधों और रसूख का उठता है नाजायज फायदा उठाता है। जानकारी के अनुसार रेडक्रास जैसी संस्थाओं में दान देकर प्रशासनिक अधिकारियों से निकटता बढ़ाना उसका आसान हथियार है। बाद में इन्हीं संबंधों की आड़ में अपने फायदे के काम करा लेता है।


